VIDEO : काशी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का योगी पर हमला, कहा- 'हमारा प्रमाण मांगा, अब आप दें हिंदू होने का प्रमाण'
Swami Avimukteshwaranand Challenges CM Yogi : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने 'हिंदू' होने का प्रमाण ...और पढ़ें
HighLights
मुख्यमंत्री योगी को 'हिंदू' होने का प्रमाण देने की चुनौती।
गोमाता को राज्यमाता दर्जा, मांस निर्यात पर प्रतिबंध की मांग।
40 दिन में मांगें न मानी तो 'नकली हिंदू' घोषित करेंगे।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रयागराज से उपजा विवाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के काशी में आने के बाद दोबारा प्रकरण चर्चा में आ गया है। शुक्रवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मुख्यमंत्री पर सीधा हमलावर नजर आए उन्होंने कहा कि 'हमारा प्रमाण पत्र तो आपने मांग लिया, अब मुख्यमंत्री जी को अपने हिन्दू होने का प्रमाण देना होगा'। इसके अलावा भी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वह सरकार पर अन्य प्रकरणों को लेकर भी हमलावर नजर आए।
उन्होंने जारी पत्र में कहा है कि धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा का अब दौर आ चुका है। बताया कि लगता है स्वतन्त्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बन्दी कानून की माँग करना ही सबसे बड़ा अपराध हो चुका है। तभी तो जब-जब जिस-जिस ने यह आवाज उठाई सरकारों ने उसे क्रूरता पूर्वक रौंद दिया। उदाहरण 1966 का दिल्ली का गोरक्षा आन्दोलन है जिसमें तत्कालीन सरकार ने जाने कितने गोभक्तों सन्तों को गोलियों से भून दिया।

बताया कि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज सहित प्रमुख सनातनियों पर भी तरह-तरह के अत्याचार किये और अब उसी आवाज को बुलन्द करने के कारण हमें और हमारा इस कार्य में सहयोग कर रहे गोभक्तों पर भांति भांति के अत्याचार और अन्याय हो रहे हैंं। जिन्हें आप सब देख ही रहे हैं। यहाँ तक कि हमसे हमारे शङ्कराचार्य होने का प्रमाण तक मांगा जा रहा है और हमारी छवि को सनातनी जनता के बीच धूमिल करने के तरह-तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। इन सबका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्तों रामभद्राचार्य आदि के माध्यम से कर रहे हैं।
बताया कि इन सबसे विचलित न होते हुये हम समस्त सनातनियों के सहित गौरक्षा के अपने संङ्कल्प को दृढतापूर्वक बढ़ाते रहेंगे। योगी आदित्यनाथ से हमारा कहना है कि "हमारा प्रमाण पत्र तो आपने माँग लिया, अब मुख्यमन्त्री जी को अपने 'हिन्दू' होने का प्रमाण देना होगा। हाल ही में शासन द्वारा शङ्कराचार्य होने की प्रमाणिकता मांगे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया गया कि धर्म सत्ता प्रमाणपत्रों की मोहताज नहीं है, किन्तु सता को अब अपनी धार्मिक निष्ठा सिद्ध करनी होगी।
उन्होंने प्रमाणपत्र का उत्तर देते हुए इसे मर्यादा और चुनौती का नाम देते हुए कहा कि "मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ जी, आपने हमसे हमारे पद और परम्परा का प्रमाणपत्र माँगा- हमने सहज भाव से वह आपको सौंप दिया। क्योंकि सत्य को साक्ष्य से भय नहीं होता। किन्तु अब समय प्रमाण देने का नहीं बल्कि आपके प्रमाण देने का है। सम्पूर्ण सनातनी समाज अब आपसे आपके हिन्दू होने का साक्ष्य माँगता है। हिन्दू होना केवल भाषणों या भगवे तक सीमित नहीं है, इसकी कसोटी गो-सेवा और धर्म-रक्षा है।
उन्होंने मुख्य माँगों में गोमाता को सम्मान और रक्त-व्यापार पर विराम का लगाते हुए कहा कि सत्ता के समक्ष स्पष्ट और अपरिहार्य शर्त रखी जा रही है। गोमाता को राज्यमाता का आधिकारिक दर्जा, जिस प्रकार हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने देशी गायों को राज्यमाता घोषित किया और जिस तरह नेपाल में गाय राष्ट्रीय पशु है उसी तर्ज पर उत्तरप्रदेश में भी गोमाता को राज्यमाता का सम्मान मिले।

कहा कि मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबन्ध उत्तरप्रदेश की पवित्र धरती से हो। यहां से होने वाले हर प्रकार के मांस निर्यात (Bovine Meat) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही तथ्यों को लेकर निर्यात के नाम पर गोवंश की हत्या का खेल बंद करने की मांग रखी। प्रेस वार्ता में सरकारी आंकड़ों के हवाले से कई तथ्य उजागर करते हुए बताया कि भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तरप्रदेश की हिस्सेदारी 40% से अधिक है। क्या रामराज्य का स्वप्न गायों के रक्त से अर्जित विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा?
आरोप लगाया कि भैस के मांस की आड़ में षड्यंत्र हो रहा है। निर्यात का सारा डेटा 'भैंस के मांस' (Buffalo Meat) के नाम पर दर्ज होता है, किंतु यह एक खुला सत्य है कि बिना डीएनए परीक्षण के इस मांस की आड़ में गोवंश को काटा और भेजा जा रहा है। बताया कि सांख्यिकीय विसंगति के तहत राज्य में भैसों की संख्या और मांस निर्यात की मात्रा में भारी अन्तर है। जब तक हर वधशाला और कण्टेनर का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य नहीं होता, तब तक यह सरकार द्वारा दी गई 'मौन' स्वीकृति है।
चेतावनी देते हुए कहा कि 40 दिनों का समय है। बताया कि "हम शासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिनों का समय दे रहे हैं। यदि इन 40 दिनों के भीतर गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं मिला और निर्यात बन्दी का शासनादेश जारी नहीं हुआ, तो परिणाम गम्भीर होंगे।"
चेतावनी दी कि "यदि 40 दिन व्यर्थ गए तो आगामी 10-19 मार्च को लखनऊ में सम्पूर्ण सन्त समाज का समागम होगा। उस दिन हम मुख्यमन्त्री जी को 'नकली हिन्दू' घोषित करने को बाध्य होंगे। जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे हिन्दू कहलाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
कहा कि यह केवल एक पद की लड़ाई नहीं बल्कि सनातन की आत्मा की रक्षा का है। प्रस्ताव दिया कि महाराष्ट्र ने गाय को राज्यमाता बनाया तो फिर भगवान राम और कृष्ण की धरती उत्तरप्रदेश मांस निर्यात का केन्द्र क्यों बनी हुई है? बस कुछ क्षण और प्रतीक्षा है, निर्णय अब आपके हाथ में है कि आप सन्तों के आशीर्वाद या इतिहास के कठघरे में नकली हिन्दू के रूप में दर्ज होंगे।"
