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मीरजापुर/सोनभद्र, जेएनएन। सोनभद्र उभ्भा कांड को लेकर मडि़हान तहसील में धरना प्रदर्शन का आयोजन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री को 11 सूत्रीय संबोधित पत्रक एसडीएम को सौंपा गया। इसके पूर्व धरने को संबोधित करतीं हुई पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि गरीबों के हक पर डाका डालने का परिणाम उभ्भा गांव की घटना है। 

उन्होंने कहा कि अधिकारियों के नजर अंदाज करने का यह परिणाम हुआ कि 10 लोगों का नरसंहार हुआ। मडि़हान तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों में दबंगों के द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। जिसके संंबंध में सीएम को अवगत कराने के लिए पत्रक दिया गया है। कहा कि आदिवासियों ने ही शुरू से जंगल को बचाया है और आज उनसे ही उनका अधिकार छीनकर भू-माफियाओं को गांव में बसाया जा रहा है। इस मौके पर पूर्व सांसद वृंदाकरात ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा और ज्ञापन सौंपा। इस संबंध में एसडीएम विमल कुमार दुबे ने तहसील क्षेत्र की समस्या को नियमानुसार सुलझाने का आश्वासन दिया। इस दौरान हीरालाल यादव, अरुण प्रताप सिंह, नंदलाल आर्य आदि उपस्थित रहे। 

वहीं घोरावल कोतवाली क्षेत्र के उभ्भा गांव में हुए नरसंहार के पीडि़तों से मिलने, घटना का कारण जानने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को गांव में पहुंचा। वहां प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मृतकों के परिजनों से मिलने के बाद घायलों से मिलकर उनका हाल जाना। घटनास्थल का निरीक्षण किया और घटना की मुख्य वजह जानने की कोशिश की। सदस्यों ने पीडि़तों के साथ खड़े रहने व उनके हक की लड़ाई लडऩे का आश्वासन दिया। 

इस दौरान प्रतिनिधि मंडल का में दिग्गज नेता वृंदा करात ने पीडि़त परिवार के लोगों से एक-एक करके मिलीं, उनकी समस्या को सुना। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के साथ जो कार्य किया गया है उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जहां-जहां भाजपा की सरकार है वहां पर आदिवासी, दलित व पिछड़ों पर अत्याचार बढ़े हैं। बताया कि हम लोग इस मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हैं। कहा कि इस पूरे प्रकरण में शामिल लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके पूर्व प्रतिनिधि मंडल के लोगों ने उभ्भा गांव में हर एक ग्रामीणों से मुलाकात कर अब तक प्रशासन से मिली सुविधा के बारे में जाना। पीडि़त परिवार के परिजनों से मुलाकात कर उनके दुख को सुना और ढांढस बंधाया। कहा कि सोनभद्र में आदिवासी समाज के लोगों पर सर्वाधिक अत्याचार किया जा रहा है। उनके जमीनों से उन्हे बेदखल किया जा रहा है, जो गलत है।

नरसंहार मामले की जांच के लिए पहुंची एसआइटी

सोनभद्र में घोरावल कोतवाली क्षेत्र के उभ्भा गांव में 17 जुलाई को हुए नरसंहार के मामले में की जांच के लिए शासन स्तर से गठित एसआइटी मंगलवार की शाम को जिले में पहुंच गई। डीआइजी जे रवींद्र गौड़ के नेतृत्व वाली टीम मामले की जांच कर दो महीने में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। टीम के आते ही कई अधिकारियों व कर्मचारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। अब उम्मीद है कि पर्दे के पीछे से घटना को अंजाम दिलाने में अहम भूमिका निभाने वालों का चेहरा भी बेनकाब होगा। 

उभ्भा में हुए नरसंहार में 10 लोगों की मौत हो गई थी और 28 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसे गंभीरता से लिया और डीजीपी ओपी सिंह को इस पर ध्यान देने के लिए कहा। साथ ही तत्काल दो टीम बनाते हुए जांच रिपोर्ट मांगी। उस आधार पर एसडीएम, सीओ सहित पांच लोगों को निलंबित किया गया। साथ ही 19 जुलाई को राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई। जांच टीम ने जब रिपोर्ट दी तो डीएम, एसपी को हटाते हुए शासन ने 28 अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। साथ ही जांच टीम की सिफारिश पर शासन ने एसआइटी का गठन कर दिया। गठित एसआइटी मंगलवार की शाम को सोनभद्र जिले में पहुंच गई। सूत्रों की मानें तो एसआइटी में डीआइजी जे रवींद्र गौड़, अपर पुलिस अधीक्षक अमृता मिश्रा, तीन इंस्पेक्टर व चार अन्य शामिल हैं। टीम बुधवार को पुलिस लाइन, कलेक्ट्रेट में पत्रावलियों की जांच करने के साथ ही उभ्भा गांव भी जा सकती है।

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Posted By: Abhishek Sharma

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