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बीएचयू में ब‍िरला छात्रावास के छात्र हुए आक्रोश‍ित, उपचार में लापरवाही और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 06:37 PM (IST)

बीएचयू के बिरला 'C' छात्रावास के एक छात्र के साथ दुर्घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर में उपचार में लापरवाही और ...और पढ़ें

बीएचयू में छात्र के इलाज में लापरवाही और दुर्व्यवहार पर छात्रों का आक्रोश। - वीड‍ियो ग्रैब

बीएचयू में छात्र के इलाज में लापरवाही और दुर्व्यवहार पर छात्रों का आक्रोश। - वीड‍ियो ग्रैब

HighLights

  1. छात्र राम को ट्रॉमा सेंटर में उपचार में घंटों देरी का आरोप।

  2. अस्पताल कर्मियों और प्रॉक्टोरियल अधिकारियों ने छात्रों से दुर्व्यवहार किया।

  3. प्रशासनिक वार्डन ने हस्तक्षेप कर छात्रों को शांत कराया, जांच की मांग।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बिरला ‘C’ छात्रावास के छात्र एवं फ्रेंच विभाग के एम.ए. द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी राम के साथ बीती मध्यरात्रि लगभग 12 बजे एक गंभीर दुर्घटना हुई। दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।

छात्रों के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद राम को ट्रॉमा सेंटर में समय पर आवश्यक प्राथमिक उपचार नहीं मिला। आरोप है कि उनके गंभीर घाव पर कई घंटों तक टांके नहीं लगाए गए और उचित चिकित्सा प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।

सुबह जब बिरला ‘C’ छात्रावास के अन्य विद्यार्थी अपने घायल सहपाठी की स्थिति जानने और उसके उपचार में सहायता करने के लिए अस्पताल पहुँचे, तब भी छात्रों के अनुसार उपचार में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने अस्पताल कर्मियों से इलाज शुरू करने का आग्रह किया, तो कुछ सुरक्षाकर्मियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और धमकी भरे लहजे में कहा गया, “इलाज नहीं करेंगे, जो कर पाओ कर लेना।”

दुर्घटना के लगभग 12 घंटे बाद, छात्रों द्वारा लगातार उपचार की मांग और चिकित्सकों से हस्तक्षेप की अपील के पश्चात राम का उपचार शुरू किया गया। बाद में उनके गंभीर घाव पर 29 टांके लगाए गए। इतने गंभीर घाव के बावजूद उपचार में इतनी लंबी देरी होना छात्रों के लिए अत्यंत चिंताजनक है।

स्थिति की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के कुछ प्रॉक्टोरियल अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों के अनुसार, अधिकारियों ने स्थिति को शांत करने और छात्रों की बात सुनने के बजाय उनसे अभद्र भाषा में बात की। छात्रों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा उन्हें धक्का दिया गया तथा हाथापाई जैसी स्थिति भी उत्पन्न हुई।

छात्रों के अनुसार, घायल छात्र राम के प्रति भी असंवेदनशील भाषा का प्रयोग किया गया और उसे “लावारिस” कहकर संबोधित किया गया। एक गंभीर रूप से घायल विश्वविद्यालय छात्र के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

जब छात्रों ने अधिकारियों से उपचार में हुई देरी, घायल छात्र की स्थिति और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल पूछे, तो उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय बहाने बनाए गए और छात्रों को पीछे हटाने का प्रयास किया गया।

इस बीच, पुलिस को छात्रों द्वारा नहीं, बल्कि प्रॉक्टोरियल अधिकारियों द्वारा बुलाया गया। छात्रों का आरोप है कि इसके बाद भी मामले को इस प्रकार प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया कि छात्रों द्वारा प्रॉक्टर के साथ मारपीट की गई थी। 

छात्रों के अनुसार, उचित उपचार पूरा हुए बिना ही राम को डिस्चार्ज किए जाने का प्रयास किया गया, जबकि उनकी स्थिति अभी भी चिकित्सकीय निगरानी की मांग कर रही थी। छात्रों के लगातार विरोध के बाद उन्हें दोबारा भर्ती किया गया।

घटना के दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने पर प्रशासनिक वार्डन मौके पर पहुँचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत की, उन्हें समझाकर शांत कराया और पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया। इसके बाद उन्होंने छात्रों को समझाकर छात्रावास वापस भेजा।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

1. राम के उपचार में हुई देरी और लापरवाही की निष्पक्ष जांच।
2. अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच।
3. अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा छात्रों के साथ दुर्व्यवहार की जांच।
4. प्रॉक्टोरियल अधिकारियों द्वारा छात्रों के साथ अभद्रता के आरोपों की निष्पक्ष जांच।
5. घायल छात्र को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

छात्रों ने कहा क‍ि इस पूरे मामले का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक गंभीर रूप से घायल विद्यार्थी के जीवन और चिकित्सा अधिकार की रक्षा करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की गई है कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।