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वाराणसी में छात्रा सृष्टि पटेल बनीं प्रधानाध्यापिका, संभाली विद्यालय की कमान, दी बैंकिंग सेवाओं की जानकारी

By Rajesh GuptaEdited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 15 Oct 2026 01:08 PM (IST)

वाराणसी के सैरागोपालपुर प्राथमिक विद्यालय में मिशन शक्ति 6.0 के तहत कक्षा 5 की छात्रा सृष्टि पटेल को एक दिन ...और पढ़ें

HighLights

  1. मिशन शक्ति 6.0 के तहत छात्रा बनी प्रधानाध्यापिका।

  2. सृष्टि पटेल ने बच्चों को बैंकिंग सेवाएं समझाईं।

  3. बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास बढ़ाना मुख्य उद्देश्य।

जागरण संवाददाता, (बड़ागांव) वाराणसी। मिशन शक्ति अभियान 6.0 एवं शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय सैरागोपालपुर पिण्डरा में बालिकाओं के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता के विकास तथा आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल की जा रही है। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी विद्यालय में नवरात्रि के विभिन्न दिनों में नवदुर्गा के स्वरूप में नौ बालिकाओं को छात्रा प्रधानाध्यापिका के रूप में विद्यालय की जिम्मेदारी सौंपने की पहल की गई है।

इसी क्रम में आज स्कन्द माता के स्वरूप में कक्षा 5 की छात्रा सृष्टि पटेल को प्रधानाध्यापिका नियुक्त कर विद्यालय का कार्यभार सौंपा गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार सिंह ने सृष्टि पटेल को प्रभार प्रदान किया। छात्रा प्रधानाध्यापिका के साथ सहयोग के लिए छह अन्य छात्राओं को भी छात्रा अध्यापिका के रूप में जिम्मेदारी दी गई। इनमें अनन्या, जानवी, तेजस्वी, अंकिता एवं परिधि (कक्षा पांच) तथा रिया (कक्षा चार) शामिल रहीं।बच्चों को बैंकिंग सेवाओं की जानकारी दी।

छात्रा प्रधाना अध्यापिका का कार्यभार संभालने के उपरांत सृष्टि पटेल ने बच्चों को बैंकिंग सेवाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को बैंक के कार्यों, बचत के महत्व तथा बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। इस प्रकार विद्यालय में नेतृत्व विकास के साथ- साथ व्यावहारिक जीवन से जुड़ी जानकारियों को भी शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है।

बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करना है उद्देश्यविद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को केवल प्रतीकात्मक रूप से पदभार सौंपना नहीं, बल्कि उन्हें नेतृत्व, निर्णय लेने, उत्तरदायित्व निभाने, अनुशासन बनाए रखने तथा सामूहिक रूप से कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

छात्रा प्रधानाध्यापिका एवं उनकी सहयोगी छात्राध्यापिकाओं को प्रातःकालीन प्रार्थना सभा से लेकर विद्यालय बंद होने तक विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता का अवसर दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से बालिकाओं में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, समानता और नेतृत्व की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। नवरात्रि में नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों से प्रेरणा लेते हुए यह प्रयास किया जा रहा है कि प्रत्येक बालिका अपनी क्षमताओं को पहचाने और भविष्य में समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका बखूबी निभायी।