वाराणसी, जेएनएन। नगरीय क्षेत्र में बरसात के दौरान मार्ग व गलियों में लगने वाले पानी से मुक्ति के लिए वित्तीय वर्ष 2012 से 15 तक स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज योजना पर यहां व्यापक काम हुए। निर्माण पर लगभग 253.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कार्यदायी एजेंसी एलएंडटी ने वर्ष 2015 में कार्य पूराकर नगर निगम के हवाले कर दिया, हालांकि निगम ने कई कमियां गिनाते हुए हस्तगत नहीं किया। तभी से योजना जमीन के अंदर लगभग निष्क्रिय पड़ी हुई है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि रखरखाव ठीक से न होने के कारण सिस्टम पूर्ण क्षमतानुसार काम नहीं कर रहा है। लापरवाही को लेकर जनप्रतिनिधियों से लगायत संस्थाओं ने कई बड़ी बैठकों में आवाज भी उठाई पर समस्या जस की तस है। एक बार फिर इस मामले को सामाजिक संस्था पृथ्वी फाउंडेशन ने उठाया है। संस्था के प्रबंधक नागेश्वर मिश्र ने कमिश्नर, डीएम, कार्यदायी एजेंसी के निदेशक आदि से शिकायत की है। साथ ही यह भी कहा कि 15 दिन में मामले को संज्ञान में नहीं लिया गया तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

'दिशा' में नहीं मिली योजना को दिशा

जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की 29 सितंबर, 2019 की बैठक में स्टार्म वॉटर ड्रेनेज योजना को लेकर विस्तार से चर्चा हुई थी। अध्यक्षता कौशल विकास मंत्री महेंद्र पांडेय ने की थी। स्टांप व रजिस्ट्रेशन मंत्री रङ्क्षवद्र जायसवाल ने इस योजना में व्याप्त अनियमितिता व भ्रष्टाचार पर गंभीर ङ्क्षचता व्यक्त करते हुए नगर निगम से सवाल किया था कि इस योजना को क्यों अब तक हस्तगत नहीं किया गया। नगर निगम के अधिकारियों की ओर से बताया गया कि इसमें बहुत खामियां हैं। कई जगह ज्वाइंट नहीं होने के साथ ही सिल्ट जमा है। योजना सुचारु रूप से काम नहीं कर रही है। लगभग 20 प्रतिशत कार्य शेष है। जिस कारण हस्तगत नहीं किया गया। कौशल विकास मंत्री समेत बैठक में शामिल अन्य मंत्रियों ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए चेतावनी दी थी कि आगामी बैठक में यह शिकायत न मिले। 31 अगस्त, 2020 को पुन: दिशा समिति की बैठक हुई। विषय पूर्व की तरह थे, निस्तारण के नाम पर कुछ भी सामने नहीं आया।

योजना में ये हुए कार्य

इस योजनांतर्गत रोड साइड ड्रेनेज 28.3 किलोमीटर, मेजर ड्रेन 48.3 किलोमीटर व डिस्पोजल ड्रेन 12 किलोमीटर तथा 11 नग पुराने ड्रेनों के जीर्णोद्धार एवं 25 नग कुंड व तालाब कनेक्शन के कार्य प्रस्तावित थे। कार्यदायी संस्था मेसर्स एलएंडटी लिमिटेड ने वर्ष 2015 में कार्य पूर्ण कराकर नगर निगम को 2015 में ही हस्तातंरण पत्र प्रेषित कर दिया।

जांच में आई सामने आईं कमियां

हस्तांतरण पत्र के बाद निर्माण एजेंसी के साथ नगर निगम ने निरीक्षण कर छोटी-छोटी कर्मियों को दर्शाया था। संस्था ने इसको ठीक करा दिया। वर्ष 2016 में तत्कालीन डीएम के आदेश के क्रम में मजिस्ट्रेटों के माध्यम से सत्यापन कराया गया। जांच में कई स्थानों पर इस सिस्टम में सीवर लाइन जोडऩे की बात भी सामने आई। टीम ने रखरखाव के अभाव में सिल्ट जमा होने की बात कही।

उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग

विभिन्न संस्थाओं की ओर से समय समय पर सड़क के निर्माण करने के कारण कैपचिट, मेनहोल ढक गए हैं। इसके चलते वर्षा के दौरान उक्त ड्रेनों से पूर्ण क्षमता से जल निकासी नहीं हो पाती है। पृथ्वी फाउंडेशन के संस्थापक का कहना है कि योजना में पूर्ण उदासीनता, लापरवाही, व्यापक पैमाने पर लूट-खसोट की गई है। उच्चस्तरीय न्यायिक जांच का विषय है ताकि संस्था को काली सूची में डालने के साथ ही जिम्मेदार अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। यह जनता का पैसा है।

'सिस्टम डंप नहीं है, बल्कि पूर्ण क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पा रही है। सड़क निर्माण के दौरान बहुतायत स्थानों पर मेनहोल के ढक्कन बंद हो गए हैं। सिल्ट भी जमा है। इसको ठीक कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि यह पूर्ण क्षमता के साथ काम करने लगेगा। -दीपक अग्रवाल, कमिश्नर।

Edited By: Abhishek Sharma