विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

वाराणसी में बोलीं श्रीलंकाई उच्चायुक्त - 'भारत और श्रीलंका एक-दूसरे के घर जैसा'

By Shivam SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 23 Aug 2026 01:43 PM (IST)

श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन्ने ने वाराणसी में एफएचआरएआई सम्मेलन में भारत-श्रीलंका संबंधों को "घर जैसा" बताया। उन्होंने पर्यटन, संस्कृति ...और पढ़ें

वाराणसी में श्रीलंकाई उच्चायुक्त ने कहा भारत-श्रीलंका के रिश्ते घर जैसे।

वाराणसी में श्रीलंकाई उच्चायुक्त ने कहा भारत-श्रीलंका के रिश्ते घर जैसे।

HighLights

  1. उच्चायुक्त ने भारत-श्रीलंका संबंधों को "घर जैसा" बताया।

  2. पर्यटन, संस्कृति और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।

  3. कोलंबो से वाराणसी के लिए सीधी उड़ानें फिर से शुरू हों।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। होटल ताज में चल रहे एफएचआरएआई के 56वें वार्षिक सम्मेलन में भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन्ने ने भारत और श्रीलंका के गहरे रिश्तों पर खुलकर बात की। सत्र में सतत पर्यटन की अध्यक्ष अंकिता जायसवाल भी मौजूद थीं। उच्चायुक्त ने साफ कहा कि दोनों देश अलग हैं, लेकिन एक-दूसरे में जाकर विदेशी देश का अहसास नहीं होता। लगता है जैसे घर आ गए हों।

उन्होंने बताया कि उनकी माता हाल में रामेश्वरम गई थीं। वहां से श्रीलंका सिर्फ 24 मिनट की दूरी पर है। यह निकटता दोनों देशों के रिश्ते की खासियत है। काशी को उन्होंने अपने दिल के बहुत करीब बताया। कहा कि बचपन में शहर का महत्व समझ नहीं आता, लेकिन बड़े होने पर इसकी आध्यात्मिक ताकत महसूस होती है।

भारत ने बुद्ध की शिक्षाएं और बोधि वृक्ष का पौधा भेजा श्रीलंका
महिशिनी कोलोन्ने ने याद दिलाया कि भारत ने बुद्ध की शिक्षाएं और बोधि वृक्ष का पौधा श्रीलंका भेजा था। श्रीलंका ने इसे बचाकर रखा और आगे कई देशों तक पहुंचाया। पुराने समय में अशोक के अभिलेखों को समझने में भी श्रीलंकाई इतिहास किताबों ने मदद की। दोनों देशों की जड़ें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

निवेश, प्रचार और मार्केटिंग साथ करें तो दोनों को होगा फायदा

उच्चायुक्त ने कहा कि पर्यटन सिर्फ आंकड़े नहीं है। यह लोगों को जोड़ने वाला सबसे अच्छा तरीका है। दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए। निवेश, प्रचार और मार्केटिंग साथ करें तो दोनों को फायदा होगा। उन्होंने सतत यानी लंबे समय तक चलने वाले पर्यटन पर जोर दिया। कहा कि शिल्प, खाना, रंग और संस्कृति देश की आत्मा है। इन्हें साथ लेकर चलना जरूरी है। यात्री अब सिर्फ फोटो नहीं ले जाते। वे कपड़े, हस्तशिल्प और लकड़ी के सामान भी साथ ले जाना चाहते हैं। वाराणसी और लखनऊ के शिल्प श्रीलंका के शिल्प से मिलते-जुलते हैं, फिर भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। दोनों जगह कारीगरों और किसानों का सम्मान एक जैसा है।

हापर्स केरल के अप्पम जैसे लगते हैं, लेकिन स्वाद अलग
उन्होंने श्रीलंकाई खाने का जिक्र किया। हॉपर्स केरल के अप्पम जैसे लगते हैं, लेकिन स्वाद अलग होता है। मसाले और पारंपरिक रेसिपी दोनों देशों में मिलते हैं। ये खाने स्वस्थ होते हैं और आज के युवा इन्हें पसंद करते हैं। पिछले साल काफी भारतीय पर्यटक श्रीलंका गए। श्रीलंकाई लोग भी भारत को बहुत प्यार से देखते हैं। एक सर्वे में कई देशों में से श्रीलंका ने भारत के प्रति सबसे अच्छा भाव दिखाया।

एक मोमबत्ती जला सकती हजार मोमबत्तियां

जब उनसे एक शब्द में दोनों देशों का रिश्ता बताने को कहा गया तो उन्होंने कहा- “होम” यानी घर। उन्होंने बुद्ध का एक विचार याद दिलाया। एक मोमबत्ती हजार मोमबत्तियां जला सकती है और उसकी रोशनी कम नहीं होती। भारत और श्रीलंका का रिश्ता भी ऐसा ही है। एक-दूसरे की रोशनी फैलाते हैं।

कोलंबो से सीधी उड़ानें फिर से हों शुरू
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि कोलंबो से सीधी उड़ानें फिर से शुरू हों तो अच्छा रहेगा। लोगों ने उनके विचारों की तारीफ की। अंकिता जायसवाल ने भी कहा कि असली मूल्य अनुभवों में है, जो आगे की पीढ़ियों तक पहुंचने चाहिए। सम्मेलन में उच्चायुक्त के इन विचारों ने सबको छू लिया। साफ संदेश था- भारत और श्रीलंका सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे के घर जैसे हैं। पर्यटन इस रिश्ते को और मजबूत बना सकता है।