वाराणसी । बनारस के कुछ कोचिंग संस्थान से लेकर मैनेजमेंट स्कूल चलाने वाले दक्षिण भारत से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां, अंकपत्र मोटी रकम वसूल कर धड़ल्ले से बांट रहे हैं। बी- टेक की एक फर्जी मार्कशीट के लिए छह लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह बनारस में अब कारोबार बनता जा रहा है। लिहाजा पुलिस के लिए भी यह बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

फर्जी डिग्री का कारोबार

क्राइम ब्रांच के पास मंगलवार को लखनऊ निवासी मनीष छत्रपति जी साहू महाराज विश्व विद्यालय, कानपुर से लेकर दक्षिण भारत के तिरूवल्लुवर विश्वविद्यालय तमिलनाडु की दर्जनों डिग्री व मार्कशीट लेकर पहुंचा। इतनी संख्या में डिग्री, मार्कशीट देखकर क्राइम ब्रांच भी चौंक पड़ी। लखनऊ के रहने वाले मनीष ने एसपी क्राइम को बताया कि पांडेयपुर के गुंजेश ने उससे मोबाइल पर संपर्क किया था और मुझे फर्जी डिग्री देने का लालच दिया। कई बार के संपर्क के बाद छह लाख रुपये में सौदा तय हुआ। आधे रुपये देने के बाद जब सत्यापन के लिए कहा तो मामला फंस गया और गुंजेश आनाकानी करने लगा। मनीष वाराणसी पहुंचा गुंजेश के दफ्तर तो वहां पहले से विमल और अतुल सिंह बैठे थे और तीनों ने मिलकर उसे धमकी दी व रुपये लौटाने से इंकार कर दिया। जानकारी मिली कि गुंजेश का मैनेजमेंट एंड टेक्नोलाजी से संबंधित कार्यालय महमूरगंज में हैं जबकि विमल व अतुल भोजूबीर सब्जी मंडी के समीप इंस्टीट्यूट चलाते हैं। फर्जी मार्कशीट की खरीद-फरोख्त के धंधे की कमान गुंजेश के पास है।

क्राइम ब्रांच जुटा रही साक्ष्‍य

क्राइम ब्रांच आरोपितों के बारे में अन्य साक्ष्य जुटा रही है। गौरतलब है कि वाराणसी में इससे पहले भी फर्जी मार्कशीट के गिरोह का एसटीएफ ने राजफाश किया था। कचहरी के आसपास की दुकानों में धड़ल्ले से चल रहे फर्जी मार्कशीट के खेल में सेना के पूर्व अधिकारी से लेकर स्थानीय दुकानदार तक शामिल रहे। 

Posted By: Abhishek Sharma