कैंसर दवाओं की ऊंची कीमतों की वजह से मरीज बेच रहे अपना घर-जमीन, सुप्रीम कोर्ट ने बताया है 'दिन दहाड़े डकैती'
कैंसर की दवाओं की अत्यधिक कीमतों से मरीज और उनके परिवार बेहाल हैं, घर-जमीन बेचकर भी इलाज का खर्च उठाना ...और पढ़ें

कैंसर दवा की कीमतों की वजह से लोग अपना घर तक बेच रहे हैं।
HighLights
कैंसर दवाओं की अत्यधिक कीमतों से मरीज और परिवार आर्थिक संकट में।
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊंची कीमतों को 'दिनदहाड़े डकैती' कहा।
वाराणसी सहित देश भर में कैंसर मरीज राहत की उम्मीद में।
शिवम सिंह, जागरण, वाराणसी। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके स्वजन दवाओं की भारी कीमतों से बेहाल हैं। कई परिवार घर-जमीन और गहने बेचकर इलाज करवा रहे हैं, फिर भी खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। सूप्रीम कोर्ट ने भी अस्पतालों में 10 गुना कीमत पर दवा बेचना ‘नरसंहार’ बताया है। इसके बाद भी जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे है और समस्या का समाधान करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।
सीएचसी-पीएचसी और जिलास्तरीय चिकित्सालय में आज तक कैंसर मरीजों को भर्ती करने की सुविधा भी शुरू नहीं हो पाई है। सिगरा निवासी 52 वर्षीय रामबाबू यादव (नाम बदला हुआ) स्तन कैंसर से पीड़ित पत्नी का इलाज करवा रहे हैं। उन्होंने आंखों में आंसू लेकर बताया कि डाक्टर ने इम्यूनोथेरेपी बताई। एक साइकल (कैंसर के इलाज में एक पूरा कोर्स) का खर्च तीन लाख के करीब आ रहा है। घर का प्लाट बेच दिया, फिर भी तीन साइकल के बाद पैसे खत्म हो गए।
अस्पताल की फार्मेसी से ही दवा लेनी पड़ती है। बाहर सस्ती मिलती तो भी मना कर देते हैं। यह दिनदहाड़े लूट है। दूसरी ओर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पास रहने वाली 45 वर्षीय सीमा देवी (नाम बदला) फेफड़े के कैंसर से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा कि ओसिमर्टिनिब जैसी दवा महीने में डेढ़ लाख से ऊपर पड़ रही है। पति की नौकरी छूट गई। गहनों के अलावा कुछ नहीं बचा।
आयुष्मान कार्ड है, लेकिन महंगी दवा का पूरा कवर नहीं मिलता। सरकार और कंपनियां मिलकर मरीजों को निचोड़ रही हैं। एनपीपीए ने 131 एंटी-कैंसर फार्मूलेशन की कीमतें नियंत्रित की हैं और कुछ दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप लगाने से सैकड़ों करोड़ की बचत हुई है, फिर भी एमआरपी और वास्तविक खरीद मूल्य के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। वाराणसी सहित पूरे देश के मरीज राहत की आस लगाए बैठे हैं।
10 महंगी कैंसर दवाओं की अनुमानित कीमत
बाजार में उपलब्ध कुछ प्रमुख महंगी दवाओं के अनुमानित दाम (ब्रांड, खुराक और शहर के अनुसार भिन्न हो सकते हैं):
दवा का नाम -
पेम्ब्रोलिजुमैब (कीट्रूडा) – प्रति डोज/साइकल 2.50 से 4.50 लाख रुपये
निवोलुमैब (आपडिवो) – प्रति डोज 1.50 से 3 लाख रुपये
एटेजोलिजुमैब – प्रति डोज 1.20 से 2.50 लाख रुपये
ट्रैस्टुजुमैब – प्रति वायल 30,000 से 70,000 रुपये
बेवासिजुमैब – प्रति वायल 70,000 से 1.50 लाख रुपये
पर्टुजुमैब – प्रति वायल 2.50 से 3 लाख रुपये
ओसिमर्टिनिब – प्रति माह 1.20 से 1.60 लाख रुपये
रिबोसिसिलिब – वार्षिक लगभग 9.50 लाख रुपये
एनहर्टू – प्रति वायल लगभग 1.67 लाख रुपये (वार्षिक 50 लाख से 1 करोड़ से अधिक)
इपिलिमुमैब – वार्षिक 30 लाख रुपये से अधिक
सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई नाराजगी, बताया ‘दिनदहाड़े डकैती’
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कैंसर दवाओं की भारी कीमतों पर नाराजगी जताते हुए इसे ‘दिनदहाड़े डकैती’ बताया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि खुदरा विक्रेता को 2700 रुपये में मिलने वाली जरूरी दवा की एमआरपी 27 हजार रुपये छापी जा रही है। यह दस गुना अंतर मरीजों के साथ सीधा शोषण है। कोर्ट ने कहा कि लोग इलाज के लिए घर-जमीन और गहने बेच देते हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में महंगी दवाओं का रिइम्बर्समेंट टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद करता है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कैंसर की दवाओं को 10 गुना महंगा बताए जाने के बाद बनारस में इसके कारोबार पर सवाल उठ रहे हैं। बनारस में कैंसर की दवाएं सामान्य दुकानों के बजाय कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर्स और सीधे अस्पतालों में मिलती हैं। कई कंपनियों और वैरायटी के कारण यहां कैंसर दवाओं की खपत का सटीक आंकड़ा जुटाना बेहद मुश्किल है।
