आजमगढ़, जेएनएन। जिले के निजामाबाद के विश्व प्रसिद्ध परंपरागत लद्यु उद्योग ब्लैक पॉटरी और टेराकोटा के सामने मिट्टी का संकट खड़ा हो गया है। कुम्हारों ने ग्राम पंचायत भैरोपुर कला में मिट्टी निकालने के लिए आवंटित पोखरी का मत्स्य पालन के लिए पट्टा किए जाने का आरोप जिला प्रशासन पर लगाया है। इस बात को लेकर विरोध जताते हुए सामाजिक संगठन प्रयास के नेतृत्व में कुम्हारों ने मंडलायुक्त से मुलाकात की। वहीं अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर मत्स्य पालन के लिए होने वाले आवंटन को रोके जाने की मांग किया।  

मिट्टी के बर्तन के लिए चाहिए चिकनी मिट्टी

संगठन के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने कहाकि एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत चयनित ब्लैक पाटरी उद्योग को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। जबकि पोखरी को मत्स्य पालन के लिए आवंटन करने का प्रयास किया जा रहा है। मिट्टी के बर्तन के लिए अधिकांश चिकनी मिट्टी इसी पोखरी से निकाली जाती है, जो माता शीतला मंदिर एवं आबादी के करीब है। कुम्हारों का कहना था कि पोखरी का मत्स्य पालन के लिए आवंटन हुआ था तो हम लोग बेरोजगार हो जाएंगे। क्योंकि पोखरी से मिलने वाली मिट्टी बंद हो जाएगी। ज्ञापन सौंपने वालो में ग्राम प्रधान सदन चंद, श्रीराम प्रजापति, विनोद प्रजापति, अनिल प्रजापति, तिलकू राम प्रजापति, धर्मेंद्र प्रजापति, अनिल प्रजापति, अर्जुन प्रजापति, मिंकू प्रजापति थे।

2015 की रिपोर्ट में आरक्षित

रणजीत सिंह ने बताया कि इसके पूर्व कुम्हारों ने पोखरी को बचाने के लिए उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र दिया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि मंडलायुक्त की मांगी गयी आख्या में तत्कालीन एसडीएम ने 11 मई 2015 को भैरोपुर कला की पोखरी को कुम्हारी कला की मिट्टी निकालने के लिए आरक्षित बताया है।

नए-नए डिजाइन हो रहा विकसित

ब्लैक पॉटरी यूं तो अपनी पहचान रखती है, लेकिन अब वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत इसका चयन कर इसे विश्व पटल पर उद्योग के रूप में पहचान दिलाई जाएगी। महाप्रबंधक उद्योग की मानें तो राज्य सरकार की ओर से बजट आवंटित कर इसकी मार्केटिंग की व्यवस्था की गई है। नए-नए डिजाइन विकसित हो रहा है। प्रोडक्शन के साथ ही इसका जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। लगभग 1636 ई. में मुगलकाल में निजाम सरकार द्वारा गुजरात के कच्छ की खाड़ी से लाए गए परिवार की ये कला आज नगर पंचायत निजामाबाद में स्थित राजेंद्र नगर मुहल्ले में लगभग 50 परिवारों के साथ फल फूल रही है।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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