आजमगढ़, जेएनएन। मानसून की बारिश शुरू हो गई है। ऐसे में बिलों व अन्य जगहों पर पानी भर जा रहा है। इसकी वजह से जहरीले सांप जगह-जगह निकलकर फुफकारी मारेंगे। अब चारों तरफ सांप नजर आने लगे हैं। इसके साथ ही सांप काटने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। सांप का काटना यानी सर्प दंश। इसके इलाज को लेकर तरह-तरह की बातें कही जाती हैं। तमाम जगहों पर झाड़ फूंक का मामला भी सामने आता है। अंधविश्वास के चक्कर में तमाम लोगों की जान भी चली जाती है। ऐसे में सांप काटने पर एहतियात बरतें और पूरी तरह से झाड़ फूंक से बचा जाना चाहिए। सांप दंश के तुरन्त बाद अस्पताल ले जाना चाहिए। कोबरा और करैत सांपों में न्यूरो टोक्सीक जहर पाया जाता है। यह जहर ब्रेन को डैमेज करता है। वाइपर प्रजाति के सांपों में हिमोटोक्सीक होता है। ये सीधे हार्ट को नुकसान पहुंचाता है। चौथी जहरीली प्रजाति रसल वाइपर है। भारत में वाटर सील बैग या चिकड़ स्नेक की संख्या ज्यादा है। जो जहरीले नहीं होते हैं। इसी प्रकार पानी वाला सांप भी होता है। इसके काटने से आदमी मरता नहीं है।

सांप काटने पर यह बरतें सावधानियां : अंग के आसपास किसी भी प्रकार का कट नहीं लगाएं, टिटनेस हो सकता है। कपड़ा या धागा बांधते समय थोड़ा गैप रखें। कपड़ा या धागा टाइट बांधने पर अंग काटने की स्थिति भी बन सकती है। घाव को पानी से साफ कर लें। तनाव बिल्कुल भी नहीं लें। जिस अंग पर सांप काटा है उसे स्थिर रखने का प्रयास करें। सांप काटे तो उसका फोटो जरूर खींच लें।

सांप के काटने पर तीन घंटे तक नहीं होती मौत : सांप जब भी काटता है तो उसके दो दांत है। इनमें जहर है जो शरीर के मांस के अंदर घुस जाते हैं। खून में वो अपना जहर छोड़ देता है। तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है। मान लीजिए हाथ पर सांप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा। उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा। ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और दिल की तरफ जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा। कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा। जहर पूरे शरीर मे उसे पहुुंचने में तीन घंटे लगेंगे। मतलब ये है कि रोगी तीन घंटे तक तो नहीं ही मरेगा। जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से में जहर पहुंच जाएगा तभी उसकी मृत्यु होगी।

.डा. सुभाष सिंह : वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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