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शारदीय नवरात्र 11 अक्‍टूबर से, हाथी पर हो रहा देवी का आगमन, जान लें घट स्‍थापना का मुहूर्त

By Saurabh AgrawalEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 20 Sep 2026 05:15 PM (IST)

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें इस वर्ष तिथि वृद्धि के कारण यह महापर्व 10 दिनों ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र: 11 अक्टूबर से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और देवी का वाहन।

शारदीय नवरात्र: 11 अक्टूबर से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और देवी का वाहन।

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा, 10 दिन का पर्व।

  2. घटस्थापना का अभिजित मुहूर्त सुबह 11:20 से 12:07 बजे तक।

  3. मां दुर्गा का आगमन हाथी पर, जो अत्यधिक वर्षा और समृद्धि का प्रतीक।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। शक्ति साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर, मंगलवार तक रहेगा। इस वर्ष नवरात्र में तिथि की वृद्धि होने के कारण यह महापर्व 10 दिनों तक चलेगा। अष्टमी तिथि दो दिन व्याप्त रहने से भक्तों को भगवती की भक्ति का विशेष अवसर प्राप्त होगा।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष नवरात्र के प्रथम दिन पूरे समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की उपस्थिति रहेगी। धार्मिक ग्रंथों में इन योगों के दौरान कलश स्थापना करना वर्जित माना गया है। ऐसी स्थिति में अभिजित मुहूर्त में देवी स्थापना करना शास्त्रसम्मत और सर्वोत्तम माना जाता है।

कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:20 से 12:07 के मध्य है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के डा. सुभाष पांडेय ने बताया कि नवरात्र का आरंभ रविवार को होने के कारण मां दुर्गा का आगमन 'हाथी' पर हो रहा है, जो अत्यधिक वर्षा और प्राकृतिक समृद्धि का प्रतीक है। समापन मंगलवार को होने से भगवती का गमन 'मुर्गे' (कुक्कुट) पर होगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी और 21 को नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा।

19 अक्टूबर को होगी संधि पूजा
ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र में महाअष्टमी तिथि समाप्त और महानवमी तिथि के आरंभ को संधिकाल कहा जाता है। अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट में संधि पूजा होती है। संधि पूजा 19 अक्टूबर सोमवार को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इसी संधिकाल में माता दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण कर चंड और मुंड असुरों का वध किया था।