सोनभद्र, जागरण संवाददाता। अनपरा डी परियोजना में 21 माह पूर्व टरबाइन जनरेटर में लगी आग से बंद चल रही 500 मेगावाट की सातवीं इकाई शनिवार को लाइटअप हो गई। इसके अलावा ओबरा की 200 मेगावाट क्षमता की 13 वीं इकाई को को भी चालू कर दिया गया। दोनों इकाइयों के उत्पादनरत होने से प्रदेश को 700 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी।

यह जानकारी प्रबंध निदेशक का कार्य संभालने के बाद पहली बार जनपद में आए एमडी पी गुरूप्रसाद ने शनिवार को अनपरा के दामिनी अतिथि गृह में वार्ता के दौरान दी। कहा कि कोयला आपूर्ति करने वाली एनसीएल को गत सप्ताह 500 करोड़ रुपये एवं अन्य कंपनियो को कुल 800 करोड़ रुपये दिए गए हैं। शेष राशि को भी जल्द भुगतान किया जाएंगा। परियोजना को सुचारू रूप में संचालित करने के लिए धन की कमी आड़े नही आने दी जाएंगी। 765 केवी अनपरा-पारेषण लाइन का कार्य अगस्त तक पूरा कर लिया जाएंगा। ट्रांसमिशन विभाग के अधिकारियो के साथ इस बिंदु पर एक बैठक रखी गयी हैं। ओबरा में राख बंधे को लेकर ऊपजी समस्या पर कहा कि वहां की 48 हेक्टेयर भूमि वन विभाग एवं 79 हेक्टेयर काश्तकारों की भूमि को हंस्तारण की प्रकिया पर तेजी से कार्य जारी हैं। एनओसी के लिए प्रयास जारी हैं।

ओबरा सी परियोजना को आगामी एक वर्ष तक में शुरू करने की कवायद पर तेजी से कार्य जारी हैं। परियोजना की भूमि व एमजीआर लाइन के किनारे अतिक्रमण पर सीजीएम अनपरा आरसी श्रीवास्तव को निर्देशित किया। कोरोना काल के दौरान मृत कर्मियो के स्वजनों ने इस दौरान एमडी से मुलाकात कर अपनी व्यथा व बेघर नहीं किए जाने की गुहार लगायी। इससे पूर्व एमडी ने शुक्रवार की शाम बेलवादह स्थित राख बंधा के उच्चीकरण का स्थलीय निरीक्षण कर पूरी जानकारी ली। परियोजना के कंट्रोल रूम से सभी इकाईयों के बिजली उत्पादन की जानकारी ली। उन्होनें परियोजना के जूनियर व शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजना संचालन के संदर्भ में विस्तृत प्राप्त की। एमडी के साथ तापीय परियोजनाओं का निदेशक तकनीकी अजीत कुमार तिवारी भी रहे।

Edited By: Abhishek Sharma