वाराणसी, जेपी पांडेय : फुलवरिया फोरलेन स्थित वरुणा पुल (इमिलिया घाट) के निर्माण में घालमेल (वित्तीय अनियमितता) सामने आया है। करीब 34.5 करोड़ बजट स्वीकृत व करीब 42 करोड़ रुपये खर्च होने पर सवाल उठने और मामला गंभीर होने पर राजकीय सेतु निगम के प्रबंध निदेशक संजीव भारद्वाज ने जांच (विशेष आडिट) के आदेश दिए हैं।

विभागीय वित्त नियंत्रक विनोद कुमार ने तीन सदस्यीय विशेष आडिट टीम गठित है और जांच कर जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है जिससे आगे की कार्रवाई की जा सके। आडिट टीम अगले सप्ताह बनारस जांच करने पहुंंचेगी। इसको लेकर विभाग में खलबली मच गई है।

फुलवरिया फोरलेन स्थित वरुणा पुल का एप्रोच मार्ग धंसने, निर्माण कार्य में धांधली और भ्रष्टाचार की जांच में राजकीय सेतु निगम के पूर्व उप परियोजना प्रबंधक सूरज गर्ग, सहायक अभियंता ज्ञानेंद्र वर्मा और अवर अभियंता राजेश कुमार को दोषी (जिम्मेदार) पाए गए हैं। प्राथमिक जांच में दोषी मिलने पर सेतु निगम के प्रबंध निदेशक संजीव भारद्वाज ने आजमगढ़ के मुख्य परियोजना प्रबंधक संतराज को जांच अधिकारी नामित करते हुए तीनों आरोपितों को आरोप पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच करने को कहा है। वाराणसी के उप परियोजना प्रबंधक एसके निरंजन को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नामित किया गया है।

दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने पर लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने नाराजगी जाहिर करते हुए दोषी अभियंताओं के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मंत्री के निर्देश पर राजकीय सेतु निगम के प्रबंध निदेशक संजीव भारद्वाज ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर बनारस जांच करने को भेजा। प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर सहायक अभियंता ज्ञानेंद्र वर्मा और अवर अभियंता राजेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है।

यह हैं जांच कमेटी में

सहायक लेखाकार हरेराम तिवारी, वरिष्ठ लेखाकार तीरथराज उपाध्याय और लेखाकार बृजेश कुमार वर्मा शामिल है।

प्रबंध निदेशक ने यह मांगी रिपोर्ट

प्रबंध निदेशक ने तकनीकी स्वीकृति के अनुसार लागत, वीओक्यू के अनुसार लागत शारांस, तकनीकी स्वीकृति के विरुद्ध सेतु पर किए गए व्यय का मदवार व्यय, इकाई को मुख्यालय से उपलब्ध कराई राशि, वर्षवार आडिट व्यय, सेतु पर सीए द्वारा सत्यापित जीएसटी, माहवार की गई कंक्रीट और आवंटन के बारे में ब्योरा मांगा है।

कटघरे में सेतु निगम के अधिकारी

वरुणा पुल में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये राशि अधिक लगाने को लेकर सेतु निगम के अधिकारी कटघरे में खड़े हो गए। सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि किस योजना से ली गई है, यदि राशि ली गई तो किस अधिकारी से अनुमति ली गई। किस अधिकारी ने सहमति जताई, क्या इस बात से शासन या मंत्री को अवगत कराया गया। जांच शुरू होने के साथ ही स्थानीय अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।

Edited By: Saurabh Chakravarty