वाराणसी [विकास बागी] : यूपी की जेलों की वर्तमान सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने के बाद योगी सरकार सूबे की सभी जेलों का सिक्योरिटी आडिट कराने जा रही है। प्रमुख सचिव अरविंद कुमार द्वारा सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कमेटी बनाकर जांच कर अतिशीघ्र रिपोर्ट देने को कहा गया है। आइजी कारागार की ओर से शासन को अवगत कराया गया है कि सूबे की जेलों में महज 58 हजार बंदियों को निरूद्ध करने की क्षमता है लेकिन वर्तमान में निरूद्ध बंदियों की संख्या 98 हजार से अधिक है। जेलों में ओवरक्राउड की स्थिति है जबकि निर्धारित क्षमता के सापेक्ष स्वीकृत पदों की संख्या में 40 फीसद की कमी है।

पेशी के दौरान जेलकर्मियों पर खतरा 

कारागार प्रशासन की ओर से प्रदेश शासन को अवगत कराया गया है कि सूबे की जेलों में इस समय 70 प्रतिशत बंदी विचाराधीन हैं। इन बंदियों में कई माफिया, गैंग लीडर व शार्प शूटर तक हैं। पेशी के दौरान ये अक्सर जेलकर्मियों से मारपीट करते हैं और फरार होने की फिराक में रहते हैं। आए दिन जेल परिसर में संगठित होकर उपद्रव करते हुए जेलकर्मियों से मारपीट करते हैं। 

इन बिंदुओं पर कराएं आडिट

आइजी कारागार की ओर से शासन को अवगत कराने के बाद प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने सभी डीएम, एसएसपी को पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि डीएम एडीएम स्तर व एसएसपी अपर पुलिस अधीक्षक व संबंधित कारागार के जेल अधीक्षक व जेलर की संयुक्त कमेटी बनाएं। कमेटी कारागार का निरीक्षण कर ऐसे स्थान चिन्हित जहां से बंदियों के पलायन होने की संभावना अधिक है। कमेटी सुझाव दे कि क्या अतिरिक्त निर्माण की जरूरत है। जेल परिसर में लगे सीसी कैमरों का स्थान देंखे और सुनिश्चित करें कि अन्य कौन-कौन से स्थान हैं जहां सीसी कैमरे लगाए जाने हैं। कारागार के बाहर स्थापित पुलिस चौकी पर उपलब्ध स्टाफ कम है या अधिक। कारागार के बाहर यदि पीएसी तैनात है तो उनके कार्यों का भी मूल्यांकन करते हुए देखे कि उनकी उपलब्धता पर्याप्त है या नहीं। 

दो साल पहले वाराणसी जेल में हुआ था बवाल

बीते अगस्त माह में सीसी कैमरा लगाने की पहल गाजीपुर जेल में निरूद्ध बंदी भड़क गए थे और दो बंदीरक्षकों के साथ ही कैमरा लगाने वाले युवक को बंधक बना लिया था। पुलिस और बंदियों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। दो साल पहले अप्रैल 2016 में भोजन-पानी को लेकर वाराणसी के जिला जेल में बंदियों ने जमकर बवाल काटा था। बंदियों ने जेल कर्मियों की पिटाई के साथ ही जेल अधीक्षक आशीष तिवारी को बंधक बना लिया था जिन्हें छुड़ाने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट गए थे। जौनपुर में साल 2015 में बंदियों व बंदीरक्षकों के बीच बवाल हुआ था। 

Posted By: Abhishek Sharma