वाराणसी, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहले से ही आतंकियों के निशाने पर था। इस बार यूपी एटीएस और मिलिट्री अभिसूचना इकाई के साझा प्रयास से वाराणसी से आइएसआइ एजेंट को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। बीते वर्ष भी सोशल मीडिया के माध्‍यम से वाराणसी में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए पाकिस्‍तान से धमकियां मिली थीं। 

यूपी एटीएस और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने जिस आइएसआइ एजेंट राशिद अहमद नामक युवक को गिरफ्तार किया है वह वाराणसी और आसपास सक्रिय रहकर सैन्य ठिकानों की तस्‍वीरें पाकिस्तान भेज रहा था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसा अारोपित सेना के साथ सीआरपीएफ के ठिकानों की भी रेकी कर चुका था। इसके अतिरिक्‍त राशिद दो बार पाकिस्तान जाकर विशेष ट्रेनिंग भी ले चुका है। यूपी एटीएस को इंटेलिजेंस के इनपुट पर चंदौली के पीडीडीयू नगर निवासी आरोपित आइएसआइ एजेंट राशिद काफी समय से पाकिस्तान में बैठे आइएसआइ हैंडलरों के सीधे संपर्क में बना हुआ था। हिरासत में लिए जाने के बाद अब इंटेलिजेंस एजेंसियां पूछताछ कर अन्‍य सूत्रों की पड़ताल कर रही हैं। 

आतंकी हमले झेल चुकी है काशी : वाराणसी में संकटमोचन मंदिर, कैंट स्‍टेशन, कचहरी परिसर, दशाश्‍वमेधघाट पर आतंकी हमला हो चुका है। लिहाजा स्‍थानीय निवासी के पाकिस्‍तान में आइएसआइ से संपर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

पूछताछ के अन्‍य बिंदु : अभी तक आरोपित ने किन स्थानों या कैम्पों की रेकी कर फोटो पाकिस्‍तान भेजी है। कितनी बार फोटो या वीडियो भेजने के बाद क्‍या रकम या गिफ्ट मिले। कहां की फोटो भेजने के लिए पाकिस्‍तान में बैठे एजेंटों ने उससे कहा था। इस काम में उसके और कितने सहयोगी भारत में सक्रिय या सम्मिलित हैं।

काशी की गलियों में गुम 530 पाकिस्तानी : देश विभाजन के बाद बहुत से लोगों का पाकिस्तान से आना-जाना रहा है। यह सिलसिला आज भी जारी है, लेकिन पाकिस्तान से 530 लोग ऐसे आए, जिनके वापस लौटने की कोई सूचना जिला प्रशासन के पास नहीं है। इसमें से 14 ऐसे हैं जो ए श्रेणी के हैं। वे सभी सरकारी दस्तावेजों में काशी की गलियों में गुम हो चुके हैं। बार-बार समीक्षा और पड़ताल होती है, लेकिन किसी के बारे में पता नहीं चल सका है।

Posted By: Abhishek Sharma

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