वाराणसी, जेएनएन। एसआइटी (विशेष अनुसंधान दल) के निर्देश पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने अंकपत्रों का सत्यापन तेज कर दिया है। गोपनीय विभाग के कर्मचारी दस दिनों के भीतर पांच जिलों अधिक  अंकपत्रों का सत्यापन कर चुके हैं। वहीं पांच जिलों का सत्यापन अंतिम चरण पर है। कर्मचारी अवकाश में सत्यापन कर रहे हैं। इसके बावजूद अब भी 20 से अधिक जिलों के अंकपत्रों का सत्यापन लंबित है। इसे करने में कर्मचारियों को कम से कम दो माह का समय और लगने की संभावना है। जबकि एसआइटी ने सात नवंबर तक सत्यापन रिपोर्ट मांगी थी।

कर्मचारियों की बढ़ाई संख्या

इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो और कर्मचारियों का स्थानांतरण गोपनीय विभाग में किया है। हालांकि कर्मचारी परीक्षा गोपनीय में जाने से कतरा रहे हैं। उन्हें इस बात का डर है कि सत्यापन की आंच कही स्वयं पर न आ जाए।

गोपनीय विभाग में कार्य करने से कतरा रहे कर्मचारी

दरअसल विश्वविद्यालय में परीक्षा रिकार्ड का रखरखाव ठीक नहीं हैं। तमाम वर्ष के टेबुलेशन रजिस्टर (टीआर) के पन्ने फटे हुए हैं। वहीं परीक्षार्थियों के विवरण में की गई कटिंग पर किसी जिम्मेदार अधिकारी का हस्ताक्षर तक नहीं है। इसके चलते ज्यादातर कर्मचारी परीक्षा गोपनीय में कार्य करने से कतरा रहे हैं। हालांकि अब अंकपत्रों का सत्यापन कंप्यूटर में दर्ज रिकार्ड से मिलान कर किया जा रहा है।  

दोबारा हो रहा सत्यापन 

विश्वविद्यालय की डिग्री पर सूबे के विभिन्न जनपदों में बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित परिषदीय विद्यालयों में करीब 5000 शिक्षक नियुक्त हुए हैं। वहीं विवि पर अंकपत्रों के सत्यापन में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप है। विश्वविद्यालय ने की ओर से एक बार वैध तो दूसरी बार उसी परीक्षार्थी को फर्जी बताया गया। कुछ डायटों से दो-दो सत्यापन रिपोर्ट पहुंच गई। एक में फर्जी तो दूसरे में उसी परीक्षार्थी को प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण दर्शाया गया था। इसे देखते हुए शासन इसकी जांच एसआइटी (विशेष अनुसंधान दल) को सौंप दी। अब एसआइटी अपने निर्देशन में अंकपत्रों का दोबारा सत्यापन करा रही है। 65 में से 40 जिलों के शिक्षकों के अंकपत्रों का सत्यापन विश्वविद्यालय कर चुकी है। इसमें करीब 250 से अधिक शिक्षकों की डिग्री फर्जी मिली है।

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