जागरण संवाददाता, वाराणसी : हम डिजिटल की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कोरोना काल ने डिजिटल की महत्ता और बढ़ा दी है। आने वाले समय में आनलाइन का युग है। ऐसे में तकनीकी से दूरी संभव नहीं है लेकिन तकनीकी के प्रोटोकाल का भी हमें पालन करना होगा। अर्थात डिजिटल प्लेटफार्म पर हमें बेहद सर्तक व सजग रहने की रहना होगा अन्यथा सहूलियत के स्थान पर हमें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

नदेसर स्थित दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित संस्कारशाला परिचर्चा में सनबीम वीमेंस कालेज वरूणा के कंप्यूटर की असिस्टेंट प्रोफेसर हर्षिता शाह ने डिजिटल संस्कार पर छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि हमें कभी भी दिखावा नहीं करना चाहिए। खास तौर पर आनलाइन प्लेटफार्म पर। उन्हाेंने बताया कि तकनीकी के इस युग में चोरी व ठगी का तरीका भी बदल गया है।

अब जालसाज तकनीकी के माध्यम से निशाना बना रहे हैं। खास बात यह है कि हम पढ़े-लिखे होने के बावजूद आसानी से उनकी जाल में फंस जाते हैं और चोर गाढ़ी कमाई मिनटों से बैंक खाते से उड़ा देते हैं। कहा कि समाचार पत्रों में अक्सर यह सब देखने व पड़ने को मिलता है। फिर भी हम बगैर सोचे समझे, एक फोन आते ही ओटीपी साझा कर देते हैं। इसी प्रकार कुछ लोग फेसबुक, वाट्स-एप में हर छोटी-बड़ी बातें साझा करते रहते हैं। यह भी ठीक नहीं हैं।

आभासी दुनिया के दोस्त भी अभासी

तमाम लोगों को इंटरनेट मीडिया का लत लगता जा रहा है। जब भी उन्हें मौका मिलता है। वह फेसबुक, वाट्स-एप, इंस्टाग्राम खोल लेते हैं। पार्टी व घर में होने के बावजूद उनका मन इंटरनेट मीडिया की ओर लगा रहता है। वह दिन-रात आभासी दुनिया में खोए रहते हैं।

आभासी दुनिया पर तमाम ऐसे दोस्त बना लेते हैं जिन्हें वह ठीक से जानते तक नहीं। इसके बावजूद आभासी दोस्त पर विश्वास भी कर लेते हैं। वहीं इसमें कुछ ऐसे लोग होते हैं जो अपनी पहचान छिपाकर इंटरनेट प्लेटफार्म पर जुड़े रहतें हैं। एक तरह में छद्मम बहुरूपिए को पहचाना कठिन होता है। ऐसे में पहले दोस्ती करते हैं। आनलाइन ही आपके दिलाें पैठ बनाकर आपको ही ठग लेते हैं। इसका आभास आपको तब होता है। जब आप ठगी के शिकार हो जाते हैं।

माता-पिता व अभिभावक सबसे बड़े दोस्त

माता-पिता व अभिभावक सबसे बड़े दोस्त होते हैं। जब भी आपको कोई परेशानी हो। आप तत्काल अपने अभिभावक से बातें साझा करें। समस्या का समाधान आनलाइन प्लेटफार्म नहीं आपके अभिभावक हैं।

ध्यान से पड़े संकारशाला की कहानी

तकनीकी के दौर में डिजिटल संस्कार की जरूरत हैं। इसे देखते हुए दैनिक जागरण में हर सप्ताह संस्कारशाला पर कहानी छप रही है। उसे आप सभी अनिवार्य रूप से पढ़े। यह कहानियां हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।

परिचर्चा में छात्राओं में दिखा उत्साह

डिजिटल संस्कार परिचर्चा में सनबीम वीमेंस कालेज वरूणा की छात्राओं में उत्साह रहा। इसमें मुख्य रूप से कालेज की शशि बनरनवाल, अनामिका सिंह, आस्था राय, दीपांजलि सिंह, श्वेता मिश्र, श्रेजल गिरी, नेहाराय सहित अन्य छात्राएं शामिल रहीं।

Edited By: Saurabh Chakravarty