मऊ [अनवार अहमद]अगर है हौसला तो मंजिलें भी हैं कई राहें, बहुत कमजोर दिल ही बात करते हैं थकानों की... जी हां, बचपन बेशक गरीबी में बीता परंतु जवानी के पौरुष पर उसकी आंच न आने दी, खुद के उद्यम से लिखी अपनी तकदीर तो बदलने को मचल उठी है पूरे गांव की किस्मत। मुहम्मदाबाद गोहना विकास खंड के हाफिजपुर गांव निवासी संजीव राय केले की खेती से सफलता की इबारत लिख रहे हैं। खेती में कड़ी मेहनत के बदौलत अपने नाम के साथ-साथ गांव का भी नाम रोशन कर रहे हैं। अब उनकी प्रेरणा से गांव के अन्य लोग भी केले की खेती की राह पर हैं। उनका गांव अब मिनी भुसावल बनने की तैयारी कर रहा है। उनका विश्वास है कि खेती अब घाटे का सौदा नहीं रहेगी। उनके अथक परिश्रम से गांव की मिट्टी सोना उगलेगी। आधुनिक खेती को देखने व खेती के तौर तरीके सीखने के लिए गांव के अलावा आसपास गांवों के किसान भी वहां पहुंच रहे हैं। केले की खेती आय का अच्छा साधन साबित हो रही है।

बचपन में ही पिता का साया सिर से उठने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी संजीव के कंधों पर आ गई। पढ़ाई करने के बाद श्री राय ने सरकारी नौकरी के लिए कई स्थानों पर भाग्य आजमाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। गांव की पुश्तैनी जमीन को खेती के माध्यम से आर्थिक स्रोत बनाने की ठानी। उनके मन में खेती से अधिक आमदनी करने की सोच बनी हुई थी। काफी सोच-विचार और लोगों से समझने के बाद उन्होंने तीन बीघे खेत में केले की खेती करने की ठानी। आर्थिक समस्या आड़े आई तो उद्यान विभाग से आर्थिक अनुदान लिया। कृषि विशेषज्ञों से फसल के रख-रखाव तथा उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण लिया। डॉ.मनीष राय के नेतृत्व में केले की खेती शुरू किया। इससे काफी उपज हुई, आर्थिक लाभ भी भरपूर हुआ। अब वे इसे काफी लंबे पैमाने पर करने की योजना बना रहे हैं। उनकी प्रेरणा से आसपास गांवों के किसान भी केले की खेती करने की योजना बना रहे हैं। बेरोजगार युवाओं के लिए संजीव प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

जो मुनाफा केले की खेती, वह अन्य में नहीं संजीव बताते हैं कि पहले आलू, मटर,चना, अरहर, गेहूं, धान, गन्ना तथा मिश्रित खेती की लेकिन उसमें मेहनत ज्यादा लगती थी। मुनाफा कम होता था। जो मुनाफा केले की खेती से है, वह किसी अन्य खेती में नहीं। इसमें गन्ने की खेती से परिश्रम और पूंजी भी कम लगती है। पहली बार आधुनिक तरीके से खेती किया हूं। अच्छी आमदनी भी हुई है। अब इसका दायरा और बढ़ाने की सोच रहा हूं।

अब गांव के अन्य किसान भी कर रहे तैयारी

श्री राय के केले की खेती से गांव के अन्य लोग भी प्रभावित हैं। उनका का कहना है कि अगले सीजन में गांव के लोगों को केले की खेती लगाने में मदद करेंगे। केले की खेती करने में जो परेशानी मुझे हुई, वह गांव के लोगों को नहीं होने देंगे। जो कोई भी किसान इस खेती को करने की इच्छा रखता है तो मुझ से संपर्क कर सकता है। जितना संभव होगा,  उसकी मदद करुंगा। क्योंकि मुझे लोगों का सहयोग करने में काफी आनंद आता है।

तीन बीघा से तीन लाख का होगा शुद्ध मुनाफा

तीन बीघा केले की खेती के लिए कुल 1800 पौधे रोपे गए हैं। इस में विभाग ने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अनुदान के रूप में प्रति पौधा 7.00 रुपये की दर से दिया है। तीन बीघे केले की खेती में तीन लाख रुपये की शुद्ध बचत हो जाने के अनुमान हैं।

-संजीव राय, केला उत्पादक किसान।

प्रति पौधा सात रुपये अनुदान देता है उद्यान विभाग

केले की खेती के लिए उद्यान विभाग किसानों को सब्सिडी के साथ अनुदान देता है। ताकि किसानों की आय दुगनी हो जाए। जिला उद्यान विभाग की तरफ से केले की खेती के लिए किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। इस के अलावा नया दौर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड संस्था द्वारा पौधों की देखरेख की जाती है।

-डाक्टर मनीष राय, डायरेक्टर नया दौर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, मऊ।

 

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