वाराणसी: संपूर्णानंद संस्कृत विवि में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को अध्यापकों ने राजभवन द्वारा जारी पत्र को सार्वजनिक किया। इसमें सभी विश्वविद्यालयों को यूजीसी की विनियमावली के तहत ही अध्यापकों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया है। अध्यापकों का आरोप है कि शिक्षकों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी की जा रही है। उधर, दूसरी ओर कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे ने नियुक्ति पर किसी भी प्रकार से रोक लगाने पर स्पष्ट इंकार किया है।

राजभवन की ओर से यह पत्र दूसरी बार जारी किया गया है। इसमें साफ किया गया है कि नियुक्ति नियमों के अनुरूप ही की जाए। हालांकि तमाम विरोध के बावजूद 24 अक्टूबर से साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को कॉल लेटर भेज दिए गए हैं। कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे ने नियुक्ति पर रोक लगाने से स्पष्ट इंकार कर दिया है। कहा कि नियुक्ति में नियमों किसी प्रकार की अनदेखी नहीं की जा रही है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने का प्रश्न ही नहीं उठता। विवि में बीते कई दिनों से अध्यापकों के आंदोलन की वजह से पढ़ाई ठप है। सोमवार को अवकाश के बाद संस्थान खुला जरूर, लेकिन पढ़ाई नहीं हुई। अध्यापकों के अलावा कर्मचारी व छात्र भी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं। अध्यापकों का आरोप है कि संस्कृत विश्वविद्यालय में यूजीसी के नए नियम के तहत परिनियम में संशोधन नहीं किए गए हैं। इतना ही नहीं पुराने विज्ञापन के आधार पर ही नियुक्ति की जा रहीं है। जबकि नियमानुसार छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद दोबारा विज्ञापन जारी करना होता है। शोध छात्र गणेश गिरी विवि में पढ़ाई शुरू कराने को लेकर धरने पर हैं।

कुलपति से मिले, नहीं बनी बात सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन व एरियर की मांग पर विवि में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने रविवार को कुलपति से प्रो. यदुनाथ दुबे से मुलाकात की। बजट नहीं होने की वजह से इस पर फैसला नहीं हो सका है। प्रो. दुबे ने इसके लिए सोमवार तक का समय मांगा है। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार तिवारी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने कुलपति से मुलाकात की।

Posted By: Jagran

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