वाराणसी, जेएनएन। आरएसएस के कार्यकर्ता शशिकांत राय (40 वर्ष) की बुधवार को रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव सारनाथ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो के ट्रैक पर मिला। जीआरपी ने जहां आत्महत्या की बात कही तो वहीं पिता मणींद्रनाथ राय हत्या की आशंका जताते हुए जीआरपी चौकी सिटी स्टेशन में तहरीर दी है। तहरीर में लिखा है कि अज्ञात लोगों ने हत्या करके इसे ट्रेन के धक्के से मौत का रंग दिया जा रहा।

चौकी प्रभारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आत्महत्या है या हत्या। फिलहाल, ट्रेन के ड्राइवर ने मेमो में दर्ज किया है कि मृतक ट्रैक पर कूद गया और ट्रेन की चपेट में आ गया। रामपुर थाना रेवतीपुर जिला गाजीपुर के मूल निवासी शशिकांत राय विश्वनाथपुरी कालोनी दौलतपुर पांडेयपुर थाना कैंट में किराए के मकान में परिवार के साथ रहते थे। परिजनों के अनुसार शशिकांत राय प्रतिदिन अलसुबह टहलने निकलते थे। कालोनी में ही आसपास टहलकर वापस आ जाते थे।

बुधवार को भी भोर में पैदल घर से निकले लेकिन देर तक वापस नहीं आए। घर पर ही मोबाइल फोन भी छोड़कर गए थे। सुबह साढ़े सात बजे के आसपास पुलिस ने फोन करके शशिकांत राय का शव रेलवे ट्रैक पर मिलने की बात बताई। आरएसएस में प्रेमचंद नगर के व्यवस्था प्रमुख की जिम्मेदारी निभाने वाले शशिकांत राय एक निजी कंपनी के इंश्योरेंस कंपनी से जुड़कर कार्य करने के बाद इन दिनों आरइएस में ठेकेदारी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। वाराणसी में वह अपनी पत्नी नीतू व सात वर्षीय बेटा समीर के साथ रहते थे।

आरएसएस कार्यकर्ताओं में गुस्सा : शशिकांत की मौत की सूचना मिलते ही आरएसएस से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया। अपने स्तर पर सभी ने जानकारी ली। कुछ कार्यकर्ता जीआरपी चौकी पर भी पहुंचे थे। वहीं देर शाम हरिश्चंद्र घाट पर जब अंतिम संस्कार हो रहा था तो घटना को लेकर कार्यकर्ताओं ने चर्चा की। नगर कार्यवाह अंब्रीश कुमार ने ट्रेन दुर्घटना से इंकार करते हुए हत्या की आशंका जाहिर की।

सुलगते सवाल, कहां गए जूते, टूटे थे सिर्फ पैर, कैसे पहुंचे सारनाथ- जीआरपी और ट्रेन चालक का भले ही दावा है कि शशिकांत की मौत ट्रेन से धक्का लगने से हुई है, वह ट्रेन के आगे कूद गए थे थे लेकिन मौके पर शव को देखकर कई सवाल खड़े हैं। पहले तो शशिकांत रोज कालोनी के आसपास टहलते थे तो बुधवार को कैसे घर से लगभग आठ किलोमीटर दूर पैदल ही सारनाथ पहुंचे। जब ट्रेन से धक्का लगा तो मृतक के शरीर पर कई जगह चोट के निशान होने चाहिए थे, शशिकांत के पैंट की पिछली जेब में मौजूद पर्स तक जेब था।

पैंट का पिछला हिस्सा तो कमर के पास थोड़ा फटा था लेकिन पीठ पर खरोंच तक नहीं थी। शशिकांत के दोनों पैर टूटे थे और मुड़े थे जबकि वह ट्रेन के आगे कूदे होते तो उनका शरीर कई जगह से कटता लेकिन ऐसा नहीं था। सिर्फ सिर के पिछले हिस्से में चोट थी। शशिकांत के पैरों में जूते तक नहीं थे जबकि वह रोज टहलने जूते पहनकर ही निकलते थे।

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