बनारस में किराए के तीन मकान लेकर लगाए थे राउटर, विदेशी काल को भारतीय नंबरों में बदलकर डिजिटल अरेस्ट
वाराणसी पुलिस ने विदेश से होने वाले 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ...और पढ़ें

वाराणसी में डिजिटल अरेस्ट फ्राड गिरोह का पर्दाफाश, विदेशी कॉल को भारतीय नंबरों में बदलकर करते थे ठगी।
HighLights
वाराणसी पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
विदेश से आने वाली कॉल को भारतीय नंबरों में बदलते थे।
दो आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का खुलासा हुआ।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम सेल, प्रतिबिंब टीम और थाना चितईपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने विदेश से भारत में होने वाले "डिजिटल अरेस्ट" फ्राड से जुड़े एक बड़े गिरोह का गुरुवार को राजफाश किया। पुलिस ने लंका, चितईपुर और शिवपुर में तीन मकानों पर छापेमारी कर छह सिम-बाक्स (192 सिम स्लाट), राउटर, वीपीएन गेटवे और अन्य उपकरण बरामद किए।
इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया। दोनों वाराणसी के रहने वाले हैं। वहीं, एक वांछित है। पुलिस के अनुसार ये ठग विदेश की इंटरनेट काल को भारतीय नंबरों में बदलकर डिजिटल अरेस्ट करके ठगी करते थे। साइबर क्राइम के एसीपी अपूर्व पांडेय ने बताया कि साइबर क्राइम सेल की प्रतिबिंब टीम को "प्रतिबिंब पोर्टल" पर कुछ संदिग्ध नंबर और म्यूल खाते की गतिविधि दिखी थी।
इन खातों से देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़ी साइबर अपराध की 41 शिकायतें पाई गईं। इनमें पुणे का एक हाई-प्रोफाइल "डिजिटल अरेस्ट" केस भी शामिल था, समें पीड़ित से 25 लाख मोहम्मद आबिद के खाते में ट्रांसफर कराए गए थे। इसी खाते में ठगी के कई और ट्रांजेक्शन हुआ था।
पुलिस ने जब खाताधारक हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो पता चला कि यह गिरोह वाराणसी में तीन स्थानों पर किराए का मकान लेकर सिम-बाक्स लगाकर कालिंग का नेटवर्क चला रहा था। इन लोगों को किया गया गिरफ्तार: सीओ अपूर्व पांडेय ने बताया कि पकड़े गए आरोपित मोहम्मद आबिद (40) निवासी सीके 47/5 सराय हरहा, थाना चौक, वाराणसी और शशि शेखर सिंह (24) निवासी के-57/75 नवापुरा, दारानगर, वाराणसी है। अभी इन लोगों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। ये लोग कुछ भी नहीं करते थे।
इन लोगों के गैंग ने करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की है जिसमें से अब तक एक लाख रुपये आबिद को मिला था। एक सौगात अस्थाना पुत्र रविंद्र कुमार अस्थाना निवासी बी फ्लैट नंबर 706 ईमार एलआइजी, पुलिस हेडक्वार्टर के पीछे ओमैक्स अपार्टमेंट लखनऊ वांछित है। उसकी तलाश की जा रही है।
सिम ओवर आइपी तकनीक से बनाते थे उपभोक्ताओं को शिकार
जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क "सिम-ओवर-आइपी" तकनीक पर आधारित था। इसमें बाक्स के अंदर कोई भौतिक (फिजिकल) सिम कार्ड नहीं लगा होता था। विदेश से इंटरनेट के जरिए आने वाली काल को गेटवे के माध्यम से स्थानीय मोबाइल टावर से कनेक्ट कर भारतीय लोकल नंबर में बदल दिया जाता था।
इससे पीड़ित को ऐसा लगता था कि काल किसी भारतीय पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी से आ रही है, जबकि काल करने वाला व्यक्ति विदेश में बैठा होता था और उसकी असली लोकेशन छिपी रहती थी। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट करके ठगी की जाती थी।
