वाराणसी, जागरण संवाददाता। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। इस क्रम में आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चायन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की एकेडमिक परफार्मेंस इंडेक्स (एपीआइ) तय करने में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होते ही आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। खास बात यह है कि आरोप आवेदन करने वाले अभ्यर्थी या विश्वविद्यालय के शिक्षक नहीं बल्कि छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष कृष्ण मोहन शुक्ल ने लगाया है। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष इसकी शिकायम राजभवन से भी की है।

इसमें कहा गया है कि आवेदनों की स्क्रीनिंग के लिए कुलपति ने मनमाने तरीके से आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चायन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) का पुनर्गठन किया है। वरिष्ठ अध्यापकों की अनदेखी करते हुए कुलपति ने कनिष्ठ शिक्षकों में विद्याचंद्रा, विशाखा शुक्ला, डा. रविशंकर पांडेय, डा. मधुसूदन मिश्र व डा. राजापाठक आइक्यूएसी का सदस्य बनाया है ताकि अभ्यर्थियों की एपीआइ मनमाने तरीके से तय किया जा सके। इस क्रम में संस्कृत विद्या विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदाें में से अनारक्षित पद संस्कृत साहित्य तथा आरक्षित पद पर योग्यता दर्शन विषय निर्धारित किया गया था। वहीं विज्ञापन में मनमाने तरीके से संस्कृत साहित्य का दर्शन कर दिया गया है। इसी प्रकार ज्योतिष विभाग में ज्योतिष गणित के विषय के अध्यापक की योग्यता भी नियम विरूद्ध तरीके से तय कर दी गई है।

छात्रसंघ अध्यक्ष ने नियुक्तियों की पारदर्शिता व शुचिता पर सवाल उठाते कुलपति पर मनमाने तरीके से कार्य करने का आरोप लगाया है। विश्वविद्यालय में अध्यापकों के रिक्त 74 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसमें प्रोफेसर के लिए 11, एसोसिएट प्रोफेसर के लिए सात व असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 56 पद शामिल है। इसके अलावा एक अनुसंधान निदेशक, एक पुस्तकालयाध्यक्ष व 14 सहायक सहायक पुस्तकालाध्यक्ष पद के लिए भी आवेदन मांगे गए थे। इस प्रकार कुल 90 पदों पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। इसी प्रकार काशी विद्यापीठ में अध्यापकों के रिक्त 89 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी हैं। इसमें प्रोफेसर के लिए 18, एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 17 व असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 54 पद शामिल है।

उधर कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि कुछ लोग अप्रत्यक्ष रूप से अपने रिश्तेदार -नातेदार की नियुक्ति करने का दबाव बनाए हुए हैं। अपनी मंशा में असफल होता देख छात्रनेताओं को मोहरा बना रहे हैं। उनसे राजभवन शिकायत करा रहे हैं। एपीआइ का निर्धारण यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार गोपनीय तरीके से हो रहा है। इसकी जानकारी कुछ ही अध्यापकों को है। एपीआइ निर्धारण के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आपत्ति दर्ज कराने का भी मौका दिया जाएगा।

Edited By: Abhishek Sharma