मीरजापुर, जेएनएन। पीडब्ल्यूडी द्वारा जिले भर में बनाई गई सड़कों में मानक के विपरीत कार्य करने की जांच में जिले के सात इंजीनियरों पर तलवार लटक रही है। हाइकोर्ट के आदेश पर विशेषज्ञ जांच समिति मामले की जांच कर रही है। दायर याचिका के अनुसार 2012 के बाद बनाई गई सड़कों में मानक के विपरीत काम हुआ जिसकी वजह से 10 से 15 वर्ष चलने वाली सड़कें एक ही वर्ष में उखड़ गईं और गड्ढा बन गया। मामले की वजह से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

बीते जनवरी महीने में ही हाईकोर्ट ने मीरजापुर में सड़क निर्माण घोटाले की जांच विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर करने का निर्देश दिया था। जिसे अमल में लाया जा राह है। कोर्ट के अनुसार प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग द्वारा विशेषज्ञों की एक कमेटी बनी जिसमें लोक निर्माण विभाग का कोई विशेषज्ञ शामिल नहीं है। कोर्ट ने सुझाव दिया था की जांच समिति में नेशनल इंस्टीट््यूट आफ ट्रेङ्क्षनग आफ हाइवे इंजीनियर्स नोएडा के विशेषज्ञ शामिल किए जाएं जो यह जांच कर स्पष्ट कर सकें कि मानकों का किस तरह से उल्लंघन किया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच समिति के दायरे में जनपद में तैनात रहे सात इंजीनियरों पर तलवार लटक रही है। रिपोर्ट हाइकोर्ट में पेश होने के बाद इन पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। हाइकोर्ट में जनपद की खस्ताहाल सड़कों के निर्माण में घोटाले की जांच व दोषियों पर कार्रवाई के लिए जनहित याचिका डाली गई है।

स्मारक घोटाले में भी नपेंगे अफसर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मायावती व मुलायम ङ्क्षसह के कार्यकाल में पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआइटी) का गठन किया गया है। अहरौरा के लाल पत्थरों की आपूर्ति से जुड़े दर्जनभर अधिकारी व कर्मचारी एसआइटी के रडार पर हैं। आरोप है कि पत्थरों की आपूर्ति के लिए नियमों को ताक पर रखकर, कई गुना कीमत बढ़ाकर करोड़ों के राजस्व को चूना लगाया गया है।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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