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काशी व‍िश्‍वनाथ मंद‍िर पहुंचे ऋतेश्वर महाराज बोले - 'ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने से आपसी सौहार्द बढ़ेगा'

By Pradyuman Pandey RamuEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 11:00 AM (IST)

सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना की और ज्ञानवापी को हिंदुओं को ...और पढ़ें

ऋतेश्वर महाराज ने काशी विश्वनाथ में दर्शन कर कहा, ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने से बढ़ेगा आपसी सौहार्द।

ऋतेश्वर महाराज ने काशी विश्वनाथ में दर्शन कर कहा, ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने से बढ़ेगा आपसी सौहार्द।

HighLights

  1. ऋतेश्वर महाराज ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया।

  2. ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने से आपसी सौहार्द बढ़ने का बयान दिया।

  3. पीएम मोदी की दीर्घायु की कामना की, शाकाहार पर जोर दिया।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। वाराणसी में सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने यशस्वी प्रधानमंत्री बताते हुए दीर्घायु होने की कामना की।

राहुल गांधी के “80 प्रतिशत मांसाहारी” बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि उनके पास कोई आंकड़ा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बहुसंख्यक जनता आज भी शाकाहार को प्राथमिकता देती है। उन्होंने जीव हत्या को उचित नहीं मानते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में इसका समर्थन नहीं है।

ऋतेश्वर महाराज ने काशी, अयोध्या और मथुरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थानों से सनातनी हिंदुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। ज्ञानवापी मस्जिद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इसे हिंदुओं को सौंपने से आपसी सौहार्द बढ़ेगा।

ऋतेश्वर महाराज ने अपने विचारों के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था को व्यक्त किया, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और सहिष्णुता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका यह बयान इस समय में महत्वपूर्ण है, जब देश में विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच संवाद और समझ की आवश्यकता है।

इस यात्रा के दौरान, ऋतेश्वर महाराज ने काशी के धार्मिक महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि यह स्थान केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे एकजुट होकर देश की समृद्धि के लिए काम करें। ऋतेश्वर महाराज का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक एकता और सहिष्णुता के संदेश को भी फैलाने का एक प्रयास था।