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बीएचयू में ‘रंगीलो– ग्रामीण उत्सव 2026’ का समापन, डेरी और ग्रामीण विकास में नवाचारों ने उद्योगों को दी संजीवनी

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 20 Sep 2026 03:19 PM (IST)

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय 'रंगीलो– ग्रामीण उत्सव 2026' का समापन हुआ, जिसमें डेरी विकास और ग्रामीण आजीविका ...और पढ़ें

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 'रंगीलो– ग्रामीण उत्सव' संपन्न, डेरी क्षेत्र में नए आयाम।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 'रंगीलो– ग्रामीण उत्सव' संपन्न, डेरी क्षेत्र में नए आयाम।

HighLights

  1. डेरी विकास और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।

  2. नवीनतम प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का प्रदर्शन किया गया।

  3. किसानों, विशेषज्ञों ने पशुपालन व दुग्ध उत्पादन पर चर्चा की।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और एनडीडीबी डेरी सर्विसेज द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘रंगीलो– ग्रामीण उत्सव 2026’ का शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हेलीपैड मैदान में शुरु हुआ। 19 से 20 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस उत्सव में किसान, डेरी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधियों ने एक मंच साझा कि‍या, जहां डेरी विकास, पशुपालन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में हो रही प्रगति को प्रदर्शित किया गया।

मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने वैज्ञानिक तरीके से डेरी संचालन, देशी पशु नस्लों के सुधार और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने, पशु पोषण एवं प्रजनन संबंधी बेहतर प्रक्रियाओं को अपनाने तथा किसानों को पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। मंत्री ने वित्तीय सहायता, पशु चिकित्सा सेवाओं और पशुधन संरक्षण के माध्यम से डेरी किसानों को सहयोग देने वाली सरकारी पहलों का भी उल्लेख किया।

प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम के महत्त्व को रेखांकित करते हुए डेरी सेवाओं, दुग्ध उत्पादन, प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र और प्रबंधन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए एनडीडीबी के साथ बीएचयू के संभावित सहयोग की बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्थान में कृषि विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विज्ञान दो प्रमुख क्षेत्र हैं।

उन्होंने डेरी क्षेत्र में शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। प्रो. चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की डेरी सुविधाओं, जिसमें राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित डेरी फार्म भी शामिल है, का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम किसानों के बीच वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने और उन्हें लाभ पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगा। दो द‍िवसीय आयोजन रव‍िवार को समाप्‍त हो गया।  

धनलक्ष्मी के., दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश के योगदान तथा ग्रामीण आजीविका, रोजगार, पोषण और महिला सशक्तीकरण में डेरी क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने नंद बाबा मिशन तथा उत्तर प्रदेश डेरी विकास एवं निवेश प्रोत्साहन नीति, 2022 के अंतर्गत संचालित पहलों की जानकारी दी, जिनका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

डॉ. मीनेश शाह, अध्यक्ष, एनडीडीबी एवं एनडीडीबी डेरी सर्विसेज ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एनडीडीबी के सहयोग से वाराणसी, कानपुर, कन्नौज, गोरखपुर और अंबेडकर नगर में डेरी संयंत्रों के पुनरुद्धार एवं संचालन पर चर्चा की। उन्होंने दुग्ध उत्पादन के पोषण संबंधी और सामाजिक-आर्थिक महत्व को रेखांकित करते हुए डेरी गतिविधियों के विस्तार तथा किसानों के लिए सतत आय के अवसर सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध होने की बात की।

दुर्गा शंकर मिश्रा, सदस्य, निदेशक मंडल, एनडीडीबी ने उत्तर प्रदेश के डेरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने में एनडीडीबी के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने दुग्ध संग्रहण, पशु प्रजनन, पोषण और किसानों को भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाने वाली डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीण आजीविका में डेरी विकास की भूमिका को रेखांकित करते हुए क्षेत्र में अधिक सहयोग और नवाचार को सुदृढ़ करने पर चर्चा की।

स्वागत संबोधन में डॉ. सी. पी. देवानंद, प्रबंध निदेशक, एनडीडीबी डेरी सर्विसेज ने कहा कि ‘रंगीलो’ किसानों और डेरी क्षेत्र से जुड़े लोगों को डेरी क्षेत्र में नवीनतम प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और शोध से परिचित होने का मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीण आजीविका को सशक्त करना मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण का आधार है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनीता सहगल वसुंधरा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजीव कृष्णन ने दिया।

उत्सव में बीएचयू के विभिन्न संकायों एवं संस्थानों की भी प्रमुख भागीदारी रही। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने साइलेज, पशु पोषण उत्पाद और छेना खीर जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए। कृषि विज्ञान संकाय ने गेहूं, दलहन और चना सहित विभिन्न कृषि उत्पादों का प्रदर्शन किया। दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग ने विश्वविद्यालय में विकसित एफएसएसएआई लाइसेंस प्राप्त उत्पाद ‘महामना प्रसादम्’ का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पशु प्रदर्शनी रही, जिसमें गिर, थारपारकर, साहीवाल और भदावरी सहित देशी पशु नस्लों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर शैक्षणिक मेधा के लिए वर्ष 2025-26 के द्वितीय एनडीडीबी मेधा छात्रवृत्ति पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

उत्सव में डेरी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी प्रौद्योगिकियों, उपकरणों और नवाचारों को प्रदर्शित करने वाले 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे। इनमें बीएचयू के स्टॉल भी शामिल हैं। प्रदर्शित उत्पादों एवं तकनीकों में कृषि उपकरण, मिलिंग मशीन, डिजिटल थॉइंग प्रणाली, स्मार्ट वजन मशीन, रोबोटिक दुग्ध दोहन प्रणाली, आंकड़ा आधारित डेरी प्रबंधन समाधान, कृत्रिम गर्भाधान उपकरण, पशु पोषण उत्पाद, हर्बल उपचार तथा टीके शामिल हैं। इनमें खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) की रोकथाम से संबंधित टीके भी शामिल हैं। प्रमुख डेरी ब्रांडों मदर डेरी, धारा, सफल और पराग के साथ निजी क्षेत्र के संगठनों तथा शैक्षणिक संस्थानों ने भी उत्सव में भाग लिया।

इस अवसर पर प्रकाश बिंदु, आईएएस, प्रबंध निदेशक, प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन (पीसीडीएफ), उत्तर प्रदेश; जयतीर्थ चारी, निदेशक, मदर डेरी तथा प्रो. गुरु प्रसाद सिंह, सदस्य, एनडीडीबी भी उपस्थित रहे। उत्सव में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, किसानों तथा डेरी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।