वाराणसी : जिला जेल में बैरकों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण महिला बंदियों की फजीहत हो रही है। वे बरामदे में ताने गए टेंट में रहने के लिए मजबूर हैं। जेल में इस समय 77 महिला बंदी हैं। जिनमें कुछ के साथ बच्चे हैं। महिला बंदियों संग अमानवीय व्यवहार का खुलासा बुधवार को तब हुआ जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता सिंह ने जेल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद सर्किट हाउस में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि जिस तरह महिला बंदियों को रखा गया है वह अमानवीय है। जाड़ा-गर्मी हो या बरसात, महिला बंदी अपने बच्चों के साथ टेंट में रहने को मजबूर हैं। टेंट में रहने के कारण इनकी सुरक्षा को खतरा है। इसकी रिपोर्ट वे केंद्रीय महिला आयोग व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को देंगी। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने बैरक के पास से निकलने वाले खुले नाले को तुरंत बंद करने का आदेश भी जेल अधिकारियों को दिया। बताया कि बंदी महिलाओं को योग सीखने के लिए प्रेरित करने की योजना है। इसके लिए बाल संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह को पहल करने का उन्होंने निर्देश दिया।

रिश्तेदार करते हैं बालिकाओं का शोषण

बाल यौन शोषण के बढ़ रहे मामलों पर कहा कि बालिकाओं का शोषण सबसे पहले रिश्तेदारों से शुरू होता है। कुछ रिश्तेदार इसी ताक में रहते हैं कि वे कम उम्र की बालिकाओं को कैसे छुएं। आजकल यह अध्यापकों द्वारा स्कूलों और कोचिंग सेंटर में भी देखने को मिल रहा।

- फिल्म शुरू होने से पहले करेंगे जागरूक

उन्होंने कहा कि हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि सिनेमा हाल में फिल्म शुरू होने से पूर्व और इंटरवल में एनिमेशन शार्ट फिल्म से बताया जाए कि 'गुड टच व बैड टच' में क्या अंतर होता है। अभिभावकों को यह भी बताने की कोशिश हो रही है कि वे बेटों को भी बताएं कि उन्हें लड़कियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। कहा कि सोशल मीडिया के प्रयोग करने के बारे में भी जागरूक करने के साथ बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

By Jagran