वाराणसी, जेएनएन। जल निगम में धांधली पर 19 अभियंताओं पर निलंबन व 17 सेवानिवृत्त अफसरों से रिकवरी का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है। प्रदेश सरकार की सख्ती से भी विभाग बेपरवाह है। ठेकेदारों से साठ-गांठ जारी है। विभागीय अभियंता धांधली करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक नया प्रकरण प्रकाश में आया है। सात अप्रैल 2020 को निविदा खोली गई जबकि भुगतान के लिए जो बिल लगा एक अप्रैल का था। खास यह कि इस मामले में जांच हुई उसकी रिपोर्ट को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मुख्य अभियंता एके पुरवार ने जांच समिति से जवाब मांगा है। स्थानीय स्तर पर अफसरों ने पड़ताल की तो दो अभियंताओं की ठेकेदार को गलत तरीके से लाखों रुपये के बिल के भुगतान संबंधित अनियमितता सामने आई।

इसको लेकर लखनऊ के राणा प्रताप मार्ग स्थित अधीक्षण अभियंता जल निगम को पत्र लिखा गया है। नियमों के विरुद्ध सहायक अभियंता पीएन गुप्ता व जूनियर इंजीनियर दीपक पांडेय की ओर से अनियमितता किए जाने के संदर्भ में जानकारी दी गई। अवगत कराया कि कार्यालय अधिशासी अभियंता षष्टम निर्माण खंड उप्र जल निगम वाराणसी में कार्यरत द्वय अभियंताओं ने विभागीय नियमों के विरुद्ध अनुबंध गठन किया। साथ ही फर्जी तरीके से कोटेशन आमंत्रित हुआ। इसके बाद अधोहस्ताक्षरी के समक्ष बिल प्रस्तुत कर दिया गया।

आपत्ति करने पर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। स्पष्ट है कि कोटेशन व निविदा सात अप्रैल 2020 को खोली गई है। निविदा खोलने से पहले ही एक अप्रैल 2020 को ठेकेदार इशांत कंस्ट्रक्शन को फर्जी अनुबंध गठन करने की कवायद हुई। इसके लिए एई की ओर से एक अप्रैल को ही पत्र निर्गत किया गया है, जो नियम के विरुद्ध  है। लखनऊ भेजे गए पत्र में बिल-बाउचर के अलावा गड़बड़ी को रेखांकित कर छाया प्रति भी संलग्न कर भेजा गया है। निजी सचिव को भी एक प्रति प्रेषित की गई है।

पूर्व में इन पर भी लगे हैं अनियमितता के आरोप

इसके अतिरिक्त जूनियर इंजीनियर दीपक पांडेय, कुणाल गौतम व शिशपाल वर्ष 2013-14 से इस खंड कार्यालय में तैनात हैं। इनके विरुद्ध तमाम अनियमितता के आरोप पूर्व में तत्कालीन अधिशासी अभियंता की ओर से लगाए गए हैं। इसकी छाया प्रति भी पत्र के साथ लखनऊ भेजी गई है।

...तो दोनों अभियंताओं को जारी होगी चार्जशीट

मुख्य अभियंता एके पुरवार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, जिसकी जांच कराई गई है। जांच समिति ने रिपोर्ट भी दे दी है। इसमें कुछ आशंकाओं को दूर नहीं किया गया है इसलिए रिपोर्ट के सापेक्ष जांच समिति से कुछ सवालों का जवाब मांगा गया है जो मिलते ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियंता दोषी मिले तो चार्जशीट दी जाएगी।

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