वाराणसी : बजबजाती नालियां, कूड़ों का अंबार, ध्वस्त नगरीय व्यवस्था। शायद यह अब बनारस की पहचान बन चुके हैं, जिन्हें सुधारने की इच्छाशक्ति न तो सरकारी तंत्र में दिखाई देती है और न ही नगर निगम में। इसके विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया।

सिगरा स्थित भारत माता मंदिर परिसर से बुधवार को इन्हीं समस्याओं को लेकर जिला कांग्रेस सेवा दल ने 'सीवर कलश यात्रा' निकाली। यात्रा मेयर आवास पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा के मेयर माई धाम पहुंचने पर 'भव्य कूड़ा श्रृंगार' भी किया गया। नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष हरीश मिश्रा ने कहा कि तड़पकर मरने से बेहतर है कि संघर्ष करके मरा जाए। पूरे शहर में सीवर चोक है। गलियां बजबजा रहीं हैं। आए दिन डेंगू, मलेरिया, मस्तिष्क ज्वर आदि की चपेट में आकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके मेयर मृदुला जायसवाल की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता नजर नहीं आती। पुरातन नगरी काशी में रोजाना हजारों दर्शनार्थियों-पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। वहीं शहर में विकास के नाम पर सरकारी तंत्र सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। नागरिकों की असुविधओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं। ऐसे में ध्वस्त जन सुविधाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ संघर्ष के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। बनारस और बनारसियों को जिंदा रखने के लिए हमें सड़क पर उतरना ही होगा।

यात्रा एवं श्रृंगार का संचालन कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव ने किया। यात्रा में प्रिंस राय खगोलन, पूर्व उपाध्यक्ष छात्रसंघ-विद्यापीठ कुंवर विश्वनाथ, वर्तमान उपाध्यक्ष रोशन कुमार, विकास सिंह, मोहम्मद अब्बास, साकिर अली, कुंवर बबलू सिंह बिंद, आशीष केशरी, रंजीत सेठ, राकेश अग्रहरि टिन्नी, नंदू पांडेय आदि शामिल थे।

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