वंदना सिंह, वाराणसी : इस मौसम में अरवी खूब बिक रही है। काफी लोगों की यह पसंदीदा सब्जी होती है। इसके पत्तों के पकौड़े भी बनाए जाते हैं जिसे बनारस में 'रिकवज' कहा जाता है। मगर स्वाद से भरपूर अरवी में सेहत का भी खजाना छुपा हुआ है। यह कई रोगों में रामबाण औषधी के रूप में काम करता है। इससे लीवर की समस्या, चर्म रोग आदि में भी लाभ मिलता है। बीएचयू के द्रव्य गुण विभाग के प्रो.केएन द्विवेदी से जानते हैं अरवी के गुणों के बारे में..

अरवी क ई तरह से फायदेमंद है। इसके कंद में एमीलेस रहता है जो भोजन क ो पाचन में सहयोग करता है। यह आलू से डेढ़ गुना अधिक पोषक होता है। इसके पत्तों में विटामिन ए प्रिक्यूसोर, विटामिन सी, कै ल्शियम ऑक्सलेट होता है जिसके कारण यह गले में काटने लगता है। यही वजह है कि इसके पकाते समय थोड़ा खाने वाला सोडा डाल देना चाहिए। कई जगहों पर लोग आमचुर भी डाल देते हैं।

रक्तस्त्राव रूक जाता है

इसका कंद एवं पत्ते शाक या पकौड़ी बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। पत्तों का डंठल का रस उक्त स्तंभक होता है जिसे शरीर में कहीं कटे पर लगाने पर रक्तस्त्राव रूक जाता है और घाव जल्दी भर जाता है।

बड़ी आंत के कैंसर में उपयोगी

यह माना जाता है कि एशिया में लगभग दस हजार वर्षो पूर्व से अरवी की खेती की जाती है। इसके पत्तों के जूस में लीवर के रोगों को दूर करने व कैंसर प्रतिरोधी क्षमता होती है। इसके मूल यानी जो अरवी जिसे हम खाते हैं ये बड़ी आंत के कैंसर में उपयोगी होता है।

हृदय को करता है मजबूत

अरवी में विटामिन सी, विटामिन बी 1, विटामिन ए, विटामिन बी 6, स्टार्च, प्रोटीन, अमीनो एसिड, बीटा साइटोस्टिराल, फ्लेवोनॉएड्स, स्टिराएड्स, कैल्शियम, फास्फोरस एवं आयरन के लवण और हृदय को मजबूती प्रदान करने वाले तत्व होते हैं।

गांठों में भी लगाया जाता

अरवी के पूरे पौधे में जलीय सत्व में बहुत अच्छी एंटीबैक्टिरीयल एक्टिविटी पाई जाती है। यह स्ट्रेप्टोकाकस, क्लेबसेला न्यूमोनी, स्यूडोमोनास और ई.कोलाई के इंफेक्शन को दूर करता है। इसके अलावा यह एंटी फंगल भी होता है और एस्पराजिलास और कैंडिडा एल्बिकेस के इंफेक्शन को दूर करता है। इसके पत्तों में पेट के कृमियों को मारने की क्षमता होती है। अरवी के पत्तों को पीसकर नमक मिलाकर गांठों और गिल्टी पर लगाया जाता है।

मुंह के छालों को ठीक करने में कारगर

इसके पत्तों के रस को कान के दर्द में प्रयोग किया जाता है। पत्तों के रस को गंजेपन में सिर पर लगाते हैं। इसकी जड़ को जलाकर राख निकालकर मधु में मिलाकर मुंह के छालों में लगाते हैं। अरवी को उबालकर जोड़ों के दर्द में इससे सेंक की जाती है। इसके ताजे पत्तों को उबालकर खाने से उच्च रक्तचाप, लीवर की व्याधियों में आराम मिलता है और इन पत्तों के रस को चर्मरोग एग्जिमा में लेप भी किया जाता है।

Posted By: Jagran