भदोही, जागरण संवाददाता। शासन के प्रमुखता वाली परियोजना वूल यार्न प्रोसेसिंग फैसिलिटी सेंटर की स्थापना में बरती जा रही उदासीनता उद्यमियों के लिए चिंता का विषय बनी है। परियोजना के माध्यम से कालीनों में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल के उत्पादन से 500 लोगों को रोजगार उपलब्ध करने की मंशा फेल हो गई।

एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत दुलमदासपुर भदोही में सेंटर भवन की स्थापना करना था। 8.68. करोड की इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी यूपीएसआईसी को सौंपी गई है। निर्माण एजेंसी को तीन माह के अंदर परियोजना को पूर्ण करने का निर्देश दिया गया था। अभी तक इसकी बुनियाद भी नहीं डाली जा सकी। जबकि आनलाइन शिलान्यास के दौरान आयोजित समारोह में अधिकारियों ने बढ़-चढ़ कर दावे किए थे। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार गंभीर है। इसी क्रम में कालीन उद्योग को बढावा देने के लिए प्रदेश स्तर से भी पहल की जा रही है। इस क्रम में एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत दुलमदासपुर भदोही में वूल यार्न प्रोसेसिंग फैसिलिटी सेंटर के स्थापना को मंजूरी मिली थी। 868.70 लाख लागत वाली परियोजना आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी। जबकि अधिकारियों ने तीन माह में परियोजना पूरी करने का भरोसा दिया था। कहा जा रहा था कि फैसिलिटी सेंटर का निर्माण प्रारंभ होने से कालीन उद्यमियों के साथ काती व्यवसायियों को काफी लाभ मिलेगा। कालीन उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल के लिए दूसरे प्रांतों की निर्भरता से मुक्ति मिलेगी। माल भाड़ा व समय की बचत के साथ कीमतों में भी कमी आएगी।

बोले अधिकारी : वूल यार्न प्रोसेसिंग फैसिलिटी सेंटर की स्थापना के लिए सरकार ने धन आवंटित कर दिया है। परियोजना स्थापित करने में सरकार का 90 फीसद योगदान रहेगा जबकि 10 फीसद धन एसपीवी (विशेष संचालन समिति) को लगाना है। कोविड की दूसरी लहर में एसपीवी के एक सदस्य का निधन होने के कारण समस्या उत्पन्न हो गई थी। कार्यदाई संस्था ने टेंडर जारी कर दिया है जिसकी अंतिम तिथि 21 अक्टूबर तक निर्धारित है। जल्द ही भवन निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। -हरेंद्र कुमार, सहायक आयुक्त उद्योग, भदोही। 

Edited By: Abhishek Sharma