आजमगढ़, जागरण संवाददाता। जिला कारागार में बंदी कुम्हारी कला में दक्ष हो रहे हैं। वह जेल के अंदर अपने समय का सदुपयोग करते हुए चाक पर कुल्हड़, मटके, कलश आदि का निर्माण कर रहे हैं। इस कला में निपुण बंदी सुरेंद्र प्रजापति 15 बंदियों को मिट्टी से बर्तन बनाने की कला सिखाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। बंदियों के साथ जेल के अधिकारी भी चाक पर हाथ आजमाने में पीछे नहीं हट रहे।

अक्टूबर 2020 से दहेज हत्या के मामले में सुरेंद्र प्रजापति निवासी निजामाबाद जेल में निरुद्ध है। वह पहले अपने घर पर मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते थे। इस कला में दक्ष होेने के कारण उन्होंने वरिष्ठ जेलर के सामने बंदियों को मिट्टी से बर्तन बनाने की कला सिखाने का प्रस्ताव रखा, तो जेल प्रशासन ने तत्काल हरी झंडी दे दी। इसके लिए जेल की तरफ से इलेक्ट्रिक चाक के साथ बर्तन बनाने के लिए मिट्टी भी उपलब्ध कराया गया। यह मिट्टी भी निजामाबाद से आती है, जिससे वह प्रतिदिन पात्र तैयार करने में लगे हुए हैं।

साेसाइटी में जमा होंगे मिट्टी के पात्र बेचने से जमा हुए रुपये : बंदियों द्वारा तैयार मिट्टी के बर्तन बाजार में बेचे जाएंगे, जिससे मिलने वाली धनराशि को बंदी कल्याण सोसाइटी में जमा किया जाएगा। उससे होने वाली आय का हिस्सा नियमानुसार बंदियों पर ही खर्च किया जाएगा।

बोल जेलर : ‘कुम्हारी कला में बंदी निपुण हो रहे हैं। जेल से छूटने के बाद वह कारोबार करके अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे। बिक्री की धनराशि उनके खाते में भेजी जाएगी।’ -रवींद्र नाथ, जेलर।

इस तरह मिलेगा चाक : माटीकला से जुड़े हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहन के लिए निश्शुल्क चाक वितरित किया जाएगा, जिससे वे अपने उत्पाद को बेहतर बना सकें। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जिले को 75 का लक्ष्य मिलने के सापेक्ष 120 आवेदन आए हैं। अब इनका साक्षात्कार 12 जुलाई को जिला ग्रामोद्योग कार्यालय सिधारी में सुबह 10 बजे से होगा। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मूलचंद ने बताया कि जिन लाभार्थियों ने अपना आवेदन पत्र जमा किया है, वे निर्धारित तिथि को चयन प्रकृया में भाग लेना सुनिश्चित करें।

Edited By: Abhishek Sharma