वाराणसी [अभिषेक शर्मा]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे का असल मकसद तीसरे प्रमुख आयोजन में परिलक्षित हुआ। 'काशी एक रुप अनेक' थीम पर ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में वाणिज्यिक आयोजन में प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को पांच ट्रिलियन करने की रुपरेखा को न सिर्फ सामने रखा बल्कि इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों और भविष्‍य के प्रयासों की भी झलक पेश कर कारोबारियों को सरकार की ओर से संबल दिया।

पीएम ने न्‍यू इंडिया की पहचान और उसे सम्‍मान देने के प्रयासों को भी कारोबारियों से साझा किया। कहा कि कोशिश की जा रही है कि सामान्‍य कारोबारी को कागजों से मुक्‍त किया जाए। एमएसएमई के साथियों को शिकायत रहती है कि एक करोड टर्न ओवर पर कागजों में उलझना पड़ता था। कितना अनावश्‍यक खर्च और समय की यह बर्बादी थी। अब बजट में आडिट पांच करोड से अधिक कारोबार वालों के लिए रखा गया है। अब सरकार ऋण सुविधा के लिए बिल और इन्‍वाइस को आधार बना रही है। सरकार अब कारोबारियों को जल्‍द ही मोबाइल आधारित ऋण भी शीघ्र उपलब्‍ध कराने की तैयारी में है।

प्रयास और योजनाओं की दिखाई झलक

टीएफसी में पीएम ने अपने भाषण के दौरान भारत को मैन्‍यूफैक्‍टरिंग सेक्‍टर का पावर हाउस बनाने के लिए मिलकर काम करने की योजनाओं का खाका पेश किया। कारोबारियाें को बताया कि एमएसएमई के लिए नई योजनाएं सरकार बना रही है। जेम (जीईएम) के बनने से सामान बेचने के लिए छोटे उद्यमियों को बड़ा बाजार मिलेगा। छोटे कारोबारियों को डिजिटल प्‍लेटफार्म से जोडने से कागजी लिखापढ़ी की व्‍यवस्‍था में बदलाव होगा और समय ही नहीं बल्कि कारोबारियों का पैसा भी बचेगा। जीएसटी से लॉजिस्टिक में बदलाव हुआ है और नेशनल लॉजिस्टिक की तैयारी सरकार कर रही है। देश में अब ऐसे उत्‍पादों का आयात कम होगा जिनका निर्माण भारत में कहीं बेहतर हो रहा है। वेल्‍थ क्रिएटर को परेशानी न हो उसके लिए टैक्‍सपेयर चार्टर बनाया जा रहा है, इससे टैक्‍स पेयर के अधिकार भी तय होंगे। बताया कि निर्माण के लिए टैक्‍स्‍ 15 फीसद किया गया है ऐसे में भारत आज दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जहां कारपोरेट दरें कम हैं। उद्यमी के हित में सरकार खड़ी है क्‍योंकि देश का लक्ष्‍य पांच ट्रिलियन अर्थव्‍यवस्‍था है। उसके लिए हर वह कदम उठाए जाएंगे जो जरूरी होंगे। छोटे उद्यमियों के हित में फैसले लिए जाएंगे। हमारी तरफ से कोई कसर नहीं रहेगी। भारत को निर्माण का पावर हाउस बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। 

आयोजन नहीं आधुनिकता का महाकुंभ

एक दिन में पीएम का ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में तीसरा कार्यक्रम था जिसे उनहोंने स्‍वरोजगार के कुंभ का नाम दिया। कहा कि शिल्‍पकार और कलाकारों का यहां एक छत के नीचे दर्शन करने का सौभाग्‍य मिला। एक एक धागा जोडकर, माटी का कण कण जोडकर निर्माण करने वाले शिल्‍पी और दुनिया की सबसे बडी कंपनियों को चलाने वाले लोग आज एक छत के नीचे बैठे हैं। यह पल मन को आनंदित करता है। दरअसल काशी एक है लेकिन इसके रुप अनेक हैं। 

यूपी के ओडीओपी के उत्‍पादों के देश विदेश के आनलाइन बाजार में पहुंचाने के सरकारी प्रयासों को भी उन्‍होंने साझा किया। कहा कि इसके लिए बुनकरों और हस्‍तशिल्पियों को जो मशीन मिल रही हैं, जो लोन मिल रहा है उससे जीवन को आसान करने की सुविधा भी हो रही है। भारत की शक्ति रही है कि हर क्षेत्र और जिले में कोई विशेष कला और उत्‍पाद सदियों से परंपराओं के जरिए जुडा़ रहा है जिसे कारोबारियों ने दुनिया में प्रचारित प्रसारित किया है। हर उतपाद की अपनी विशेषता और अपनी कहानी है। आदिवासी अंचलों में आर्टिस्टिक प्रोडक्‍ट बनाए जा रहे हैं। उद्योग हैं जो पीढी़ दर पीढी़ बढ रहे हैं और यही ओडीओपी के अवधारणा की प्रेरणा है। भारत को पांच ट्रिलियन अर्थव्‍यवस्‍था बनाने की इनमें पूरी सामर्थ्‍य है। संसाधन और कौशल की कमी नहीं रही है बस व्‍यापक सोच से काम करने और दुनिया तक पहुंचने की जरूरत है।

मिल रहा सरकारी साथ

यूपीआइडी द्वारा दो वर्षों में तीस जिलों में 3500 से अधिक लोगों को उत्‍पादों के डिजाइन में सहायता दी गई। वहीं उनमें सुधार के लिए 1000 कलाकारों को सुविधा दी गई। आधुनिक टूल किट देकर, वर्कशॉप करके यूपीआइडी ने हजारों कलाकारों को कारोबार में नयापन और कारोबारी गतिविधि को बढाने में मदद की है। दुनिया में शिल्‍प मेला जो चल रहा है उसमें यूपीआइडी बड़ा प्‍लेटफार्म बन रहा है। ओडीओपी से बनी एक प्रदर्शनी को देखकर आया हूं। इसको आप भी बारीकी से देखिए। यहां काफी शानदार कलेक्शन है। दोना पत्‍तल वालों को आधुनिक मशीन दी गई है। आज सिंगल यूज प्‍लास्टिक का विकल्‍प खोजा जा रहा है। पूरी दुनिया के साथ इसे साझा किया जा सकता है। पुरातन परंपरा को 21 वीं सदी की आवश्‍यकताओं के हिसाब से ढालने और परिष्‍कृत करने की जरूरत है। तभी संभव है जब परंपरा के साथ संस्‍थागत सपोर्ट मिले।

बदली है काशी की उद्योग परंपरा

पीएम ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले बनारस का सामान्‍य बुनकर और निर्यातक ऑनलाइन संवाद नहीं कर सकता था, क्‍योंकि ऐसा कोई मंच नहीं था। सरकारों के पास पैसा या समझ नहीं थी, नहीं कह सकता। मगर काशी में पांच वर्षों में बहुत बदलाव आया है। पारंपरिक उद्याेगों को मार्केट और तकनीक देने की जरूरत है। यही प्रयास सरकार की ओर से हो रहा है। सरकार की ओर से सोलर चरखा, इलेक्ट्रिक लूम और इलेक्ट्रिक चाक शिल्पियों को दिया जा रहा है।

यूपी में बढ़ा है कारोबार

यूपी में ओडीओपी योजना में केंद्र को भविष्‍य दिख रहा है। बताया कि बीते दो वर्षों में यूपी से बढोतरी हो रही है। यह सब एमएसएमई के कारण संभव हो पा रहा है। ई कामर्स पोर्टल इसमें कारोबार को मदद कर रहा है। बजट ने आम लोगों के साथ ही कारोबारियों की प्राथमिकता तय कर दी है। बजट ने छोटे और मझले उद्याेग का खाका खींचा है। निर्माण और ईज आफ ग्रोइंग बिजनेस रोजगार निर्माण के माध्‍यम हैं। बनारस और आसपास का पूरा क्षेत्र बुनकर और कालीन वालों का केंद्र है। लाखों का जीवन कपडा और कालीन पर चलता है। इसी को मदद का प्रयास इस बजट में किया है। भारत करोडों का टेक्‍निकल टेक्‍सटाइल इंपोर्ट कर रहा है, बाजार की मांग थी कि पालीमर पर टैक्‍स में छूट मिले तो सरकार ने अब पूरा कर दिया है। नेशनल टेक्निकल टेक्‍स्‍टाइल मिशन शुरू किया गया है। इस साल के बजट में डिफेंस कारीडोर के लिए 3700 करोड का प्रावधान है। लखनऊ में डिफेंस कंपनियां आई थीं और समझौते हुए इसका लाभ छोटे उद्योगों को मिलेगा और यूपी को भी लाभ मिलेगा।

Posted By: Abhishek Sharma

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