वाराणसी में शुरू हुई विधानसभा चुनाव की तैयारी, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त बोले - 'हर प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को साथ रखें'
वाराणसी में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू हो गई है, जिसमें ईवीएम और वीवीपैट की एफएलसी कार्यशाला आयोजित की ...और पढ़ें

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा : सूचना विभाग।
HighLights
वाराणसी में विधानसभा चुनाव हेतु ईवीएम-वीवीपैट एफएलसी कार्यशाला शुरू।
वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग ने राजनीतिक दलों को शामिल करने का निर्देश दिया।
21 जिलों के अधिकारी एफएलसी प्रक्रिया का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी है। निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग की देखरेख में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवी पैट की एफएलसी कार्यशाला शुक्रवार को आयोजित हुई।
मनीष गर्ग ने सभी जिलाधिकारी को और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश किया कि एफएलसी की कार्रवाई में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को साथ में रखकर ही प्रक्रिया करें। वे जब तक ना आएं तब तक उन्हें ट्रैक करते रहे। हर हाल में उनको प्रक्रिया में शामिल करें ताकि बाद में किसी प्रकार का आरोप प्रत्यारोप से बचा जा सके।
वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग ने शुक्रवार को सर्किट हाउस सभागार में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवी पैट की फ्रस्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) कार्यशाला की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने पूरी प्रक्रिया को एक-एक कर जिम्मेदार अधिकारियों के सामने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया।
उप निर्वाचन आयुक्त के साथ प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा, आयोग के प्रधान सचिव बीसी पात्रा, अवर सचिव राकेश कुमार आदि मौजूद हैं। साथ ही कार्यशाला में वाराणसी, मीरजापुर, आजमगढ़, बस्ती, प्रयागराज और गोरखपुर मंडल के 21 जिलों के जिलाधिकारी, निर्वाचन का कार्य देखने वाले एडीएम, उप जिलानिर्वाचन अधिकारी, सुपरवाइजर आदि भाग ले रहे हैं। पहले सेशन में जहां प्रेजेंटेशन के माध्यम से एफएलसी की प्रक्रिया को बताया गया वहीं दूसरे सेशन में हैंड ऑफ ट्रेनिंग अर्थात ईवीएम और वीवी पैट पर भौतिक रूप से करके अधिकारियों ने देखा।
क्या है एफएलसी
एफएलसी चुनावी प्रक्रिया की पहली तैयारी मानी जाती है। इसके तहत ईवीएम और वीवीपैट की जांच होती है। इसमें मशीनों की सफाई, तकनीकी निरीक्षण, पुराने डेटा को हटाना आदि की जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि ईवीएम की बैलेट यूनिट व कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट चुनाव के लिए पूरी तरह ठीक है कि नहीं। एफएलसी अधिकृत इंजीनियरों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की जाती है।
