वाराणसी, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र काशी जल संचयन को लेकर मॉडल बनेगी। इसकी कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश के मुख्य सचिव ने पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी को जरूरी निर्देश दिए हैं। सचेत किया कि इस मसले को लेकर भारत सरकार की एक टीम बहुत जल्द काशी पहुंच रही है।

पानी को लेकर प्रधानमंत्री की चिंता को देखते हुए भारत सरकार की टीम यहां पर जल स्रोतों का सर्वे करेगी। इसमें ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल कर फोटो व वीडियो फुटेज भी बनाया जाएगा। इसके आधार पर एक मुकम्मल रिपोर्ट बनेगी जिसे जल शक्ति मंत्रालय भेजा जाएगा। यह सारी कवायद पीएमओ के निर्देश पर हो रही है। रिपोर्ट के आधार पर ही जल शक्ति मंत्रालय काशी में जल संचयन की संभावनाओं का आकलन करेगी ताकि पुराने स्रोतों का जीर्णोद्धार कर नए स्रोतों की तलाश की जा सके।

करोड़ों की कवायद, उपयोगिता कौड़ी भर भी नहीं: काशी में जल संचयन को लेकर अब तक हुए कार्य में करीब दो से तीन करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन उसकी उपयोगिता कौड़ी भर भी नहीं है। योजना के मुताबिक नगर के सभी कुंड व तालाबों का जीर्णोद्वार कर दो करोड़ से बने स्टार्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम से जोड़ा जाए ताकि बारिश का पानी उसमें जमा हो। इस योजना के क्रियान्वयन को एक दशक पूरा होने वाला है लेकिन धांधली के चलते अभी तक उपयोगी नहीं बन सकी। वर्तमान में नगर में कुल 63 तालाब हैं जो जल संचयन का बड़ा साधन बन सकते हैं। 

बोले अधिकारी : जल संचयन को लेकर काशी को मॉडल बनाने पर मंथन हो रहा है। भारत सरकार की एक टीम बहुत जल्द बनारस आ रही है जो सर्वे कर जल संचयन की संभावनाओं की तलाश करेगी।

-आशुतोष कुमार द्विवेदी, नगर आयुक्त