वाराणसी, जेएनएन। पार्क संवारने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने संकोच छोड़ दिया है। दैनिक जागरण के आह्वान पर स्वच्छता के मतवाले रोज सुबह निकल जा रहे हैं। पार्क की सफाई करने के साथ ही लोगों को स्वच्छता का संकल्प दिला रहे हैं। ऐसा ही रविवार की सुबह भी हुआ। नेवादा के माधव मार्केट में सृजन सामाजिक विकास न्यास के अध्यक्ष अनिल सिंह की अगुवाई में पर्यावरण प्रेमी माधव पार्क में जुटे। हाथ से हाथ मिलाया और देखते ही देखते पार्क का कचरा साफ हो गया।

पार्क संवारने को लेकर लोगों के जज्बे को रेखांकित करें तो किसी ने झाड़ू संभाला तो किसी ने फावड़ा। किसी को कुछ नहीं मिली तो नंगे हाथ से ही कचरा उठाने लगे। यूं समझें कि पार्क में जमा कचरे को साफ करने के लिए एक-दूसरे में होड़ सी मच गई थी। चूंकि इस पार्क में संघ की शाखा भी लगती है, इसलिए पर्यावरण प्रेमियों का जज्बा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। संघ के कार्यालय प्रमुख श्याम के अलावा शशि सिंह, प्रणव कुमार सिंह, जेपी सिंह, सत्येंद्र पांडेय, रविशंकर, धीरज, ओपी राय, इंजीनियर अमित सिंह, विनय जी, रितु खरे विनय कुमार सिंह आदि भी पहुंच गए थे। सभी ने मिलकर पार्क की सफाई की। इसके अलावा कालोनी के लोगों के बीच पहुंचे और पार्क को हराभरा व साफ-सुथरा रखने के पीछे छिपे उद्देश्य को साझा किया। बताया कि शहर में बढ़ते प्रदूषण के लड़ने के लिए पार्क बेहद जरूरी है। यहां के पौधे वातावरण को बेहतर बनाएंगे। सभी ने कालोनी के लोगों से पार्क को साफ रखने की अपील की। कहा कि गंदगी करने से मानव स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। वहीं साकेत नगर में भी संवारे गए पार्क में बचे कार्यो को पूरा करने के लिए लोग जुटे थे।

- नगर निगम कर्मियों ने बहाया पसीना पार्क को संवारने के लिए आम लोगों की सहभागीता के बीच नगर निगम प्रशासन का सहयोग भी अहम है। सुपरवाइजर नफीस की निगरानी में सफाई कर्मियों ने जमकर मेहनत की और पसीना बहाया। कचरे का निस्तारण किया और घास की कटिंग भी की।

- पार्षद भी आए साथ तो बनी बात स्थानीय पार्षद रवींद्र सिंह भी पार्क संवारने के लिए साथ आए। उन्होंने सफाई कर्मियों को कार्य को लेकर जहां जरूरी निर्देश दिए तो वहीं कालोनी के लोगों को पार्क संवारने के लिए आगे आने के लिए अनुरोध किया। पार्षद ने भरोसा दिया कि पार्क के लिए उनकी ओर से जो भी बन सकेगा, वह किया जाएगा।

- साकेत नगर का कार्य अंतिम चरण में साकेत नगर में पार्षद कमल पटेल के नेतृत्व में लोग रविवार की सुबह पार्क में जुटे। जिस पार्क में पौधरोपण हुआ था उसके बचे कार्य को पूरा करने के लिए श्रमदान किया। कटी घासों का निस्तारण किया गया तो वहीं रोपे गए पौधों को पानी दिया गया। पूर्व पार्षद वरुण सिंह ने कहा कि एक-दो दिन के श्रमदान के बाद पार्क का कार्य पूरा हो जाएगा। श्रमदान में सत्यप्रकाश सोनकर, संजय प्रियदर्शी, संजय यादव, विकास साहनी, दिनेश पटेल, अभिषेक राय, विजय भट्ट आदि शामिल थे।

- पर्यावरण संतुलन के लिए पौधारोपण बहुत ही जरूरी है। हम अच्छे वातावरण की उम्मीद तो करते हैं लेकिन अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते, अपनी जिम्मेदारी समझें और दैनिक जागरण की मुहिम को अपनी मुहिम समझ ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं। -रवींद्र सिंह पार्षद

- पौधों के बिना धरती पर जीवन की कल्पना बिल्कुल भी नहीं की जा सकती है। प्रत्येक व्यक्ति को सोचना चाहिए कि आज हम जो सांस ले रहे हैं वह किसी हमारे जैसे व्यक्ति द्वारा लगाए गए पौधों की वजह से ही है, इसलिए पौधारोपण जरूर करें। -रामसूचित पांडेय

- मानव जनसंख्या तो लगातार बढ़ रही है लेकिन पेड़ पौधों की संख्या लगातार कम हो रही है। यह ¨चता का विषय है। लोग अपने फायदे के लिए पेड़ों पर आरी चला रहे हैं लेकिन नए पौधे कम ही लगा रहे हैं और जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। -दीनानाथ सिंह

- प्रदूषण के भय ने सरकार को नए सिरे से सोचने को विवश कर दिया। निश्चित ही पर्यावरण के हालात विषम हैं। इन्हें सम करने के लिए आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएं। दैनिक जागरण ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा है। -डा. गिरीशचंद्र तिवारी

- बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए पौधारोपण से बढि़या कोई उपाय नहीं हैं। पौधारोपण के आगे सारे प्रयास बौने ही हैं। लोग अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी देखभाल का भी संकल्प लें ताकि सर्द मौसम में बढ़े प्रदूषण को काबू में किया जा सके। -रितेश तिवारी

- पौधे हमारी जिंदगी हैं। हमें भोजन, हवा, पानी सब कुछ तो देती ही हैं उनकी सुंदरता मन को मोह लेती है। इंसान को तो यह ¨जदगी देते ही हैं, इस धरा पर अन्य जीव जंतुओं को भी यह पौधे जीवन देते हैं। -विनय कुमार सिंह

- पौधे केवल शुद्ध वायु ही नहीं देते हैं अपितु कई प्रकार की घातक बीमारियों की दवा भी देते हैं। जिन बीमारियों में एलोपैथी फेल हो जाती है उनमें पेड़ पौधे ही दवा के रूप में काम आते हैं जो हार चुके इंसान को नया जीवन भी दे जाते हैं। -अंब्रीश सिंह

- पार्क के लिए जितनी चिंता करनी चाहिए वह कम दिखाई दे रही है। जिस पार्क को संवार कर रखना चाहिए उसमें लोग कचरा फेंक रह हैं। गंदगी व पौधों को नष्ट करने से पार्क बदहाल होते जा रहे हैं जो खतरनाक है। -महेंद्र नारायण सिंह

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