ईपीएफ कटौती की रकम 25000 रुपये होने से पेंशन में इजाफा और घटेगी इनहैंड सैलरी, जानें पूरा गणित जो डालेगा आपके जेब पर असर
श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये कर दी है, जिससे कर्मचारियों की ...और पढ़ें

ईपीएफओ वेतन सीमा बढ़ी: पेंशन में वृद्धि, इनहैंड सैलरी पर असर का पूरा गणित।
HighLights
ईपीएफओ वेतन सीमा 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हुई।
इनहैंड सैलरी से प्रति माह 1200 रुपये अतिरिक्त कटौती।
सेवानिवृत्ति पर कर्मचारियों को अब मिलेगी बेहतर पेंशन।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। निजी क्षेत्र की कंपनियों, संस्थाओं, प्रतिष्ठानों या अन्य संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये कर दिया है।
इसके परिणामस्वरूप, 25000 रुपये या उससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी से प्रति माह 1200 रुपये की अतिरिक्त कटौती होगी। इस श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों का पेंशन अब 15000 रुपये मानकर 12 प्रतिशत यानी 1800 रुपये की कटौती होती थी, जो अब बढ़कर 3000 रुपये हो जाएगी। इस प्रकार, उनकी इनहैंड सैलरी से अतिरिक्त 1200 रुपये की कटौती होगी। हालांकि, इसके साथ ही उन्हें ब्याज भी अधिक मिलेगा।
कई कर्मचारी स्वेच्छा से अधिक ईपीएफ कटवाते थे, लेकिन उसकी अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत तक थी। अब नई योजना में स्वेच्छा से अधिक ईपीएफ कटवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस नई योजना का सबसे बड़ा लाभ पेंशन में होगा। सरकार की इस पहल के बाद कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद एक सम्मानजनक पेंशन की उम्मीद जगी है। अब कर्मचारियों को लगभग 12500 रुपये तक पेंशन मिलने की संभावना बढ़ गई है।
ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा 25000 रुपये तक बढ़ने से पहले, यह 2014 से पहले केवल 6500 रुपये थी। उस समय, कर्मचारियों को 2000 रुपये से भी कम पेंशन मिलती थी। यह स्थिति 2001 से 2014 तक बनी रही। इससे पहले, पेंशन की सीमा केवल 500 रुपये थी। ऐसे में, सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को केवल 1000-1200 रुपये की पेंशन मिल पाती थी।
सरकार की नई योजना के अनुसार, निश्चित रूप से अब कर्मचारियों की पेंशन बढ़ जाएगी। पहले, भले ही किसी का वेतन अधिक था, लेकिन पेंशन 15000 रुपये के वेतन के अनुसार ही बनती थी। कर्मचारी चाहकर भी पेंशन अंशदान अधिक नहीं जमा करा सकते थे। अब पेंशन अंशदान अधिक जमा होने लगेगा, जिससे पेंशन में वृद्धि होगी। वहीं, इनहैंड सैलरी की बात करें तो 25000 रुपये या उससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के वेतन से कुल 3000 रुपये की कटौती होगी, जिसमें से 1200 रुपये की अतिरिक्त कटौती शामिल है। पहले यह कटौती 1800 रुपये थी।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, कर्मचारी की सैलरी (बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता) से होने वाली पीएफ कटौती का वितरण मुख्य रूप से दो हिस्सों में होता है: 12% कर्मचारी और 12% नियोक्ता। योगदानकर्ता का कुल प्रतिशत वितरण इस प्रकार है:
कर्मचारी का हिस्सा 12% होता है, जो पूरी तरह से कर्मचारी भविष्य निधि खाते में जमा होता है। अधिकतम सीमा 3000 रुपये है। वहीं, नियोक्ता या कंपनी का हिस्सा भी 12% होता है, जो दो हिस्सों में बंटता है। 8.33% पेंशन योजना में और 3.67% भविष्य निधि में जमा होता है।
इस नई योजना के तहत, कर्मचारियों को न केवल अधिक पेंशन मिलने की उम्मीद है, बल्कि उनकी इनहैंड सैलरी में भी बदलाव आएगा। यह पहल कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की इस नई योजना से कर्मचारियों को बेहतर पेंशन और वित्तीय सुरक्षा की उम्मीद जगी है, जो उनके सेवानिवृत्त जीवन को अधिक सम्मानजनक बनाएगी।
सरकार की नई योजना के बाद निश्चित ही अब कर्मचारियों की पेंशन बढ़ जाएगी। कारण पहले भले ही किसी का वेतन अधिक था लेकिन पेंशन 15000 वेतन के अनुसार ही बनती थी। चाह कर भी कर्मचारी पेंशन अंशदान अधिक नहीं जमा करा सकता था। हालांकि अब पेंशन अंशदान अधिक जमा होने लगेगी, जिससे पेंशन अधिक मिलेगी। वहीं इनहैंड सेलरी की बात है तो 25 हजार या उससे अधिक वेतन पाने वाले के वेतन से अतिरिक्त 1200 के साथ कुल 3000 रुपये की कटौती होगी। अभी तक 1800 रुपये की कटौती हो रही थी।
