जागरण संवाददाता, वाराणसी। श्रीदिगंबर जैन समाज काशी के तत्वावधान में चल रहे महान पर्यूषण पर्व के छठवें दिन बुधवार को जैन मंदिरों में विशेष पूजन किया गया। छठवें दिन अनंत चतुर्दशी पूजा प्रारंभ हुई। इसमें श्रीफल, चंदन, अक्षत, पुष्प, बादाम चढ़ाकर श्रावकों ने मंत्रोच्चारण के साथ तीर्थंकरों का पंचाभिषेक किया। विश्व को महामारी से निजात दिलाने के लिए चौबीसी पूजन एवं श्रीजी भगवान की शांति धारा की गई। धर्म के दस लक्षणों पर प्रवचन करते हुए आचार्य विशद सागर ने 'उत्तम संयम धर्म' पर कहा कि संयम मनोरंजन के लिए नहीं, आत्म रंजन के लिए होता है। मन चंचल है, गलत दिशाओं में जल्द प्रवृत्त होता है। इंद्रियां मन को गलत विषयों में लगा देती हैं। मन को सही दिशा में रखने के लिए संयम रखना जरूरी है। संयम, नियम, मर्यादा, अनुशासन से जीवन महान बनता है। लक्ष्य की प्राप्ति होती है। संयम को रत्न की तरह संभालना चाहिए। संयम हमें मर्यादा में रहना सिखाता है। वहीं कश्मीरी गंज खोजवां में अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए प्रो. फूलचंद प्रेमी ने कहा कि संयम आध्यात्म की कसौटी है। भोग-उपभोग की सीमा तय करना ही संयम है। जीवन का निर्वाह संयम के बिना असंभव है।

उधर नगर के सभी जैन मंदिरों में शास्त्र प्रवचन, भजन, भगवान पार्श्वनाथ, देवी पद्मावती, क्षेत्रपाल बाबा की महाआरती की गई। महिला मंडल की ओर से वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई।

इस दौरान दीपक जैन, राजेश जैन, अरुण जैन, जिवेंद्र जैन, वीके जैन, राजेश भूषण जैन, आरसी जैन, प्रमिला सामरिया, ऊषा जैन थीं।

भदैनी जैन मंदिर में मनाया गया उत्तम संयम धर्म

भदैनी स्थित दिगंबर तीर्थ क्षेत्र में पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन बुधवार को 'उत्तम संयम धर्म' मनाया गया। सुबह सात बजे भगवान सुपार्श्वनाथ का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद शांति धारा दस धर्म पूजन, सोलह करण पूजन, नंदीश्वर दीप पूजन किया गया। इसके बाद भगवान सुपार्श्वनाथ एवं चौबीस भगवान की महाआरती की गई। पांचवे दिवस पर मनुष्यों को अपने मन को पवित्र करना चाहिए। इससे इंद्रियों पर विजय प्राप्त होता है।

Edited By: Saurabh Chakravarty