अभिभावक भी समझें कि प्रतिबंधित मांझे से मौत होने पर उनका बच्चा भी अपराधी बनेगा और जेल भी जाएगा : मोहित अग्रवाल
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने वाराणसी में प्रतिबंधित मांझे के इस्तेमाल पर कड़ी चेतावनी दी है, जिसमें कहा गया है ...और पढ़ें

वाराणसी में जानलेवा मांझे पर पुलिस की सख्ती: अभिभावक भी रहें सतर्क, बच्चों पर हो सकती है कार्रवाई।
HighLights
प्रतिबंधित मांझे के प्रयोग पर बच्चों के अभिभावक भी जिम्मेदार।
विक्रेता और उपयोगकर्ता दोनों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होगा।
ड्रोन निगरानी और हेल्पलाइन से मांझे पर कड़ी कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। कातिल मंझा का प्रयोग करने वाले बच्चों पर अभिभावक अगर निगरानी नहीं रखेंगे तो हादसा होने पर आपका मासूम बच्चा अपराधी बन जाएगा और उसे जेल तक हो सकती है, लिहाजा अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उनकी पतंंगों की उड़ान पर आपका भी नियंत्रण जरूरी है, यह अहम जानकारी दैनिक जागरण को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने देते हुए अभिभावकों को सतर्क रहने की बात कही है।
प्रतिबंधित चाइनीज मांझे (नायलान/सिंथेटिक धारदार धागे) से साड़ी कारोबारी की दर्दनाक मौत के बाद पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब सिर्फ बेचने वाले ही नहीं, बल्कि प्रतिबंधित मांझा खरीदकर पतंग उड़ाने वाले भी हत्या के मुकदमे में बराबर के दोषी माने जाएंगे। अगर किसी की जान जाती है तो दोनों पर हत्या का केस दर्ज होगा।
उन्होंने कहा कि केवल सूती (काटन) धागा ही कानूनी रूप से अनुमत है। बाकी कोई भी नुकीला, धारदार या खतरनाक मांझा- चाहे वो चीन से आया हो या देश में ही बना हो पूरी तरह प्रतिबंधित और अवैध है।
रविवार को कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर एक साड़ी कारोबारी सुनील कुमार की गर्दन मांझे से कटने से मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस आयुक्त ने पूरे जिले में विशेष अभियान शुरू कर दिया। सोमवार तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में प्रतिबंधित मांझा बरामद किया गया।
पुलिस आयुक्त ने एक संवाद कार्यक्रम में विस्तार से बताया कि पिछले साल 2025 में शहरभर में चलाए गए अभियान में 75 दुकानदारों को गिरफ्तार किया गया था और करीब 10 टन प्रतिबंधित मांझा जब्त किया गया था। 2024 में हुई एक मौत के मामले में पहली बार हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा गया था। यह बात सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी एफिडेविट में रखी गई थी। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ‘चाइनीज मांझा’ शब्द की परिभाषा बहुत व्यापक है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की परिभाषा के अनुसार कोई भी ऐसा धागा जो गर्दन काट सके या गंभीर चोट पहुंचा सके, प्रतिबंधित है। उसका मूल स्थान चीन होना जरूरी नहीं। देश के अंदर भी अगर कोई फैक्ट्री या घर में ऐसा धागा बना रहा है तो वह अवैध है। उन्होंने कहा, पिछले साल मैं खुद कुछ दुकानों पर छापा मार चुका हूं। लोग बहस करते हैं कि ये तो देशी है, चाइनीज नहीं। लेकिन अगर वो नुकीला और धारदार है तो प्रतिबंधित है। केवल काटन का सूती धागा ही अलाउड है।
ड्रोन निगरानी और हेल्पलाइन
अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए चार ड्रोन तैनात किए गए हैं। ये ड्रोन छतों, गंगा घाटों, पुलों और खुले स्थानों पर पतंग उड़ाने वालों की वीडियोग्राफी कर रहे हैं। संदिग्ध मांझा मिलते ही मौके पर पुलिस टीम पहुंचकर जांच कर रही है। आम नागरिकों से अपील करते हुए पुलिस आयुक्त ने विशेष हेल्पलाइन नंबर 9670705555 जारी किया। उन्होंने कहा कि अगर आपको कहीं प्रतिबंधित मांझा बेचते हुए या इस्तेमाल करते हुए नजर आए तो तुरंत इस नंबर पर सूचना दें। उसी दिन छापेमारी होगी, मांझा जब्त होगा और आरोपी जेल भेजा जाएगा।”
पुलों की रेलिंग ऊंची करने का प्रस्ताव
ज्यादातर दुर्घटनाएं पुलों और फ्लाईओवर पर हो रही हैं। पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुल की दोनों तरफ की रेलिंग के बीच धागा अटक जाता है। तनाव लेने पर सामने से आ रही मोटरसाइकिल सवार की गर्दन पर लग जाता है। इसे रोकने के लिए जिलाधिकारी से वार्ता कर प्रस्ताव भेजा गया है। पुलों की दोनों तरफ की रेलिंग की ऊंचाई लगभग छह फीट कर दी जाएगी, ताकि धागा गर्दन की सीध में न आए। जिलाधिकारी ने इस पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
उत्पादन स्रोत पर भी कार्रवाई
मांझा कहां से आ रहा है, इस पर भी फोकस किया जा रहा है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि जनपद के औरंगाबाद क्षेत्र में सबसे ज्यादा गोदाम हैं। पिछले साल भी वहां रेड पड़ी थी। इसके अलावा बनारस और आसपास के क्षेत्रों में जहां धागे का काम होता है, वहां चोरी-छिपे उत्पादन हो रहा है। सूरत और अहमदाबाद से भी धागा आ रहा है। अब उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों पर भी छापेमारी की जाएगी।
पुनरावर्ती अपराधियों पर सख्ती
एक सवाल के जवाब में पुलिस आयुक्त ने कहा कि लाइसेंस रद्द करने का सुझाव अच्छा है। पुलिस विभाग लाइसेंस नहीं जारी करता, इसलिए संबंधित विभाग से समन्वय कर पिछले पांच-दस साल में पकड़े गए लोगों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। अगर लाइसेंस जारी हुआ होगा तो रद्द कराने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि यह अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर है, इसलिए पूरी तरह खत्म करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन एनजीटी भी इसे गंभीरता से ले रही है। आने वाले समय में लाइसेंसिंग और वार्षिक नवीनीकरण जैसी गाइडलाइन बन सकती हैं।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि 2024 की घटना के बाद 2025 में और 2026 के अधिकांश हिस्से में जनपद में कोई मौत नहीं हुई थी। यह घटना अचानक हुई है। सामान्यतः ऐसी घटनाएं मकर संक्रांति के आसपास होती हैं। तुरंत सबक लेते हुए अभियान शुरू कर दिया गया है। सीसीटीवी फुटेज और जांच आगे बढ़ने पर ही साजिश का कोई पहलू सामने आएगा। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
जनता की भूमिका
पुलिस आयुक्त ने आम नागरिकों से अपील की कि बच्चे अगर प्रतिबंधित मांझा इस्तेमाल कर रहे हैं तो उन्हें तुरंत रोकें और जागरूक करें। जान बहुत कीमती है। बेचने वाला, खरीदने वाला और इस्तेमाल करने वाला—तीनों बराबर के दोषी हैं। पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन जनता की सक्रिय भागीदारी से ही इस कातिल मांझे पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकता है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस आयुक्त ने कहा कि छोटी-छोटी स्वार्थ की वजह से इतनी बड़ी त्रासदियां हो रही हैं। अब सख्त से सख्त कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है।
