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विश्वनाथ मंदिर में उत्कृष्ट प्रबंधन और सुगम दर्शन पूजन की अनुकरणीय व्यवस्था बना गए निवर्तमान सीईओ विश्व भूषण मिश्र

By Saurabh AgrawalEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 02:40 PM (IST)

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र का लगभग पौने तीन साल की सराहनीय सेवा ...और पढ़ें

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्र का स्थानांतरण, छोड़ गए उत्कृष्ट प्रबंधन की छाप।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्र का स्थानांतरण, छोड़ गए उत्कृष्ट प्रबंधन की छाप।

HighLights

  1. विश्व भूषण मिश्र का श्री काशी विश्वनाथ मंदिर सीईओ पद से स्थानांतरण हुआ।

  2. श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में उत्कृष्ट कार्य किए गए।

  3. दर्शन व्यवस्था को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई नवाचार लागू किए।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास में प्रशासनिक कुशलता और उत्कृष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण पारी का समापन हुआ है। न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में करीब पौने तीन वर्षों तक अपनी सराहनीय सेवाएं देने के बाद विश्व भूषण मिश्र का स्थानांतरण हो गया। फिलहाल मंदिर न्यास के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी की घोषणा नहीं की गई है।

पीसीएस अधिकारियों के बीच श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी को 'लूक्रेटिव' पोस्टिंग नहीं माना जाता था। लेकिन विश्व भूषण मिश्र ने नवाचार और उल्लेखनीय कार्यों से इस पद की साख को नए मुकाम पर पहुंचा दिया। वहीं कुंभ के पलट प्रवाह के दौरान भी उन्‍होंने भीड़ को संभाला और जहां कुंभ का आगे आयोजन होना है वहां के अध‍िकारी भी भीड़ प्रबंधन सीखने धाम आ चुके हैं।

वहीं, शासन- सत्ता से करीब से जुड़े लोगों का कहना है कि निर्विवादित पौने तीन साल के कार्यकाल के बाद यह रूटीन ट्रांसफर है। दायित्व जरूर बदला लेकिन विश्व भूषण मिश्र के श्रद्धालुओं की सुविधा, सहूलियत, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे।

श्रद्धालुओं की सहूलियत को उठाए कई व्यावहारिक कदम

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद देश दुनिया से श्रद्धालुओं की भारी दर्शन पूजन और धाम की भव्यता निहारने के लिए उमड़ रही थी। इसी बीच जनवरी 2024 में उन्हें श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दरबार में आने वाले करोड़ों शिवभक्तों की सहूलियत के कार्यों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया।

उन्होंने दर्शन व्यवस्था को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई व्यावहारिक कदम उठाए। धाम में श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ का सुगम दर्शन हो और और भक्त अच्छा अनुभव करके लौटे उसके लिए उन्होंने कई प्रकार के नवाचार कि इसमें श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था, धाम में आने वाले बच्चों को टाफी, चाकलेट का वितरण, प्रांगण में छाया का प्रबंध, जिगजैग बैरिकेडिंग, खोया-पाया सेंटर के साथ ही छोटे बच्चों को दूध पिलाने के लिए एक अलग कक्ष की व्यवस्था कराई।

झांकी दर्शन की एसओपी से भक्तों को हुआ सुगम दर्शन

सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रयागराज महाकुंभ व अन्य महत्वपूर्ण पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने एक प्रभावी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की। जब भी मंदिर में श्रद्धालुओं का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता था, तब व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए गर्भगृह में स्पर्श दर्शन को अस्थायी रूप से रोककर झांकी दर्शन की पारदर्शी व्यवस्था प्रभावी कर दी जाती थी।

इस दूरदर्शी सोच का ही परिणाम था कि कम से कम समय में अधिकतम भक्त बिना किसी असुविधा के बाबा विश्वनाथ के दिव्य दर्शन प्राप्त कर सके। उन्होंने मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ कतार प्रबंधन को इस प्रकार व्यवस्थित किया कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी और भीड़ के बावजूद कोई कष्ट नहीं हुआ।