वाराणसी, जागरण संवाददाता। विश्व अर्थराइटिस या गठिया दिवस 12 अक्टूबर को हर साल पूरे विश्व मे मनाया जाता है। गठिया या आर्थ्राइटिस दुनिया भर में तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है। ऐसे में विश्व अर्थराइटिस दिवस हमें न सिर्फ इसके प्रति जागरूक करता है, बल्कि इस रोग से बचाव के लिए प्रेरित भी करता है।आज की बदलती जीवनशैली, मोटापा और गलत खानपान की वजह से अर्थराइटिस रोग तेजी से बढ़ रहा है। पहले यह ज्‍यादातर बड़ी उम्र के लोगों को होती थी, पर अब यह युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है।

यह शरीर के एक जोड़ या एक साथ कई जोड़ों को प्रभावित कर सकता है। गठिया के लक्षण जोड़ों में दर्द, जकड़न , सूजन और सामान्य गतिविधियों में होने वाली कमी हो जाना हैं। जोड़ों (ज्वाइंट्स) को निशाने पर लेने वाली बीमारी अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या दुनिया भर में बढ़ती जा रही है। 100 से अधिक प्रकार के गठिया से लोग ग्रसित हो सकते हैं। इनमे से ऑस्टीओआर्थ्रायटिस और रूमटॉड आर्थ्राइटिस के मरीज़ सबसे ज़्यादा मिलते है। सामान्य स्थिति में आस्टियो आर्थराइटिस 50 साल की उम्र के बाद होता है। इसलिए वृद्धावस्‍था में इससे ग्रसित होते है।

अर्थराइटिस का दर्द इतना तेज होता है कि व्यक्ति को न केवल चलने–फिरने बल्कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। जोड़ो में दर्द होने के साथ–साथ दर्द के स्थान पर सूजन भी आ जाती है। इसके अलावा गलत एंगल से अधिक देर तक झुककर काम करना, सिर पर नियमित तौर पर वजन उठाना, झुककर कोई वजन उठाना, कंप्यूटर के सामने गलत तरीके से घंटों बैठे रहना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना, गर्दन झुकाकर घंटों काम करने से भी गठिया की शिकायत होती है। इसके अलावा रुमेटोइड अर्थराइटिस में मरीज के शरीर के अंग अकड़ जाते हैं। इसमें महिलाओं में अधिक शिकायत होती है। इसी तरह यूरिक एसिड बढ़ने से भी गठिया (गाउट) की समस्या होती है।गठिया की शिकायत होने पर तुरंत डाक्टर की सलाह लें। इसमें फिजियोथैरेपी को नजरअंदाज न करें।

इस बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है कि जीवनशैली में बदलाव लाया जाए. बाहर खाने से बचें और जंक फूड का कम से कम सेवन करें। साथ ही नियमित तौर पर व्‍यायाम करें और वजन को बढ़ने न दें. साथ ही पौष्टिक आहार लें। जीरियाट्रिक मेडिसिन विभाग चिकित्सा विज्ञान संस्थान में मनाया गया विश्व गठिया दिवस

आज विश्व गठिया दिवस पर चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रफ़ेसर बीआर मित्तल जी ने गठिया के सम्बंधित एक जागरूकता संदेश दिया। उन्होंने बताया कि वृद्ध लोगों में गठिया की समस्या बहुत आम है और लगभग 50 से 70 प्रतिशत मरीज गठिया के रोग से पीड़ित होते हैं। वृद्ध लोगों में गठिया की बढ़ती समस्या एवं गठिया के चिकित्सकों की भारी कमी को देखते हुए जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में जिरियाट्रिक रूमेटोलॉजी मैं फ़ेलोशिप पाठ्यक्रम को सुकृति दे दी गयी है और जल्द ही यह पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे। और गठिया या जेरीऐट्रिक के मरीज़ों के लिए जेरीऐट्रिक मेडिसिन विभाग में अलग ओपीडी मंगलीवार से हर मंगलवार को पुनः शुरू कर दी गयी है।

जेरीऐट्रिक मेडिसिन विभाग के गठिया विशेषज्ञ प्रफ़ेसर अनूप सिंह ने सिर सुन्दरलाल हस्पताल के चिकित्सक अधीक्षक प्रोफेसर के.के. गुप्ता के साथ ओपीडी में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया और वृद्ध मरीजों को छड़ी वितरण किया गया। कार्यक्रम में जेरीऐट्रिक विभाग के डॉक्टर और कर्मचारी भी उपस्थित थे। जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग पूरे उत्तर प्रदेश का पहला जिरियाट्रिक विभाग है एवं भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस विभाग को रीजनल जिरियाट्रिक सेंटर की उपाधि दी है। जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग आने वाले दिनों में और विकसित होगा जो इस क्षेत्र के वृद्ध लोगों को काफी लाभान्वित करेगा।

Edited By: Abhishek Sharma