वाराणसी, जेएनएन। बर्तन कारोबारियों के हिम्मत की दाद देनी होगी। बड़े-बड़े व्यापारी मंदी से निबटने को रियायत मांग रहे तो बर्तन कारोबारी नियमों में समानता, इंफ्रास्टक्चर बढ़ाने की मांग कर रहे। उनका इशारा ऑनलाइन कारोबार एवं बाजार में बुनियादी जरूरतों के अभाव की ओर था। बोले, ऑनलाइन दुकानों से साजिश के तहत सस्ते मूल्य पर उत्पाद बेचने से उत्पन्न दुश्वारियों को मंदी कहना गलत होगा। सरकार नियमों में समानता करे तो बर्तन बाजार फिर से रफ्तार पकड़ लेगा।

ऑनलाइन दुकानों पर हो सख्ती तो दूर होंगी दुश्वारियां
यूं तो बरसात के मौसम में कारोबार कमजोर रहता ही है। लेकिन 60 करोड़ की गिरावट गंभीर है। कारोबारियों ने कहाकि गिरावट की जड़ में ऑनलाइन कारोबार है। सरकार नियमों का शिकंजा ऑनलाइन कारोबार पर भी कसे हो तो बर्तन बाजार बूम (उछल) कर जाएगा। क्यों कि मूल्य समान होने पर ऑनलाइन बर्तन खरीदने की रिस्क गिनती के लोग उठाएंगे। सरकार को इसके लिए सख्ती दिखानी होगी।

17 फीसद महंगाई बढ़ा रही 12 फीसद जीएसटी
सरकार ने बर्तन पर 12 फीसद जीएसटी लगा दिया है। घरेलू जरूरत का सामान होने से इसे गुड्स एवं सर्विस टैक्स से बाहर रखना चाहिए था। छोटा एवं कम मुनाफे का कारोबार होने से व्यापारी मुश्किल में हैं। उनके पांच फीसद खर्च तो सीए की फीस व जरूरी कागजात तैयार कराने में खर्च हो जा रहे हैं।

कारोबार की दुश्वारियां
- ऑनलाइन ब्रांडेड बर्तनों की सस्ते मूल्य पर उपलब्धता।
- बाजार में पार्किंग का अभाव होना।
- जीएसटी के कारण बर्तन के मूल्यों में वृद्धि।
- बैंकों का असहयोगात्मक रवैया।
 बर्तन बाजार

-150 करोड़ का बनारस में बर्तन बाजार
- 400 से ज्यादा छोटी-बड़ी बर्तन की दुकानें
- 5000 से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं 
बर्तन कारोबारियों की मांग
-सामान बेचने का सबको अधिकार, लेकिन नियम हो एक समान
-इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाए सरकार, दौडऩे लगेगा कारोबार  
-12 नहीं पांच फीसद होनी चाहिए जीएसटी की दर

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