वाराणसी [मुहम्मद रईस]। दुनिया की सबसे प्राचीन व जीवंत नगरी काशी ने हमेशा ही देश-दुनिया को राह दिखाई है। यह शहर बौद्धिक पहल का अगुआ रहा है। ऐसे में इन दिनों एक अस्सी घाट के नजदीक बीएचयू के कुछ छात्रों ने मिलकर एक छोटी मगर प्रभावी पहल की है, जो न सिर्फ तेजी से लुप्त हो रही शब्द संस्कृति को पोषित कर रही है, बल्कि युवाओं में पर्यावरण संरक्षण की अलख भी जगा रही है। यहां सामाजिक जागरुकता के लिए युवाओं के एक समूह ने एेसा नजीर सामने रखा है जो काशी की दम घोट रही हवा को संबल देने के काम आएगा।

बात अस्सी घाट के नजदीक 'मुफ्त टिनी लाइब्रेरी' व 'मुफ्त ट्री लाइब्रेरी' की हो रही है। मंच कला संकाय-बीएचयू के शोध छात्र संदीप मुखर्जी, एमएसी छात्र आकाश बिंद सहित पूर्व छात्रों बलजीत सिंह व सुमित ने 'हेल्पिंग वर्ब फाउंडेशन' के माध्यम से स्वयं के खर्च पर यह कारनामा कर दिखाया है। लाइब्रेरी में उपलब्ध किताबों को आप निश्शुल्क प्राप्त कर सकते हैं। बदले में अपने पास धूल फांक रही किताबें यहां दान भी दे सकते हैं, ताकि वह किसी और के काम आए। इसके ठीक बगल में छोटी सी 'ट्री लाइब्रेरी' भी है, जहां से मुफ्त पौधे लेकर आप अपनी मनपंसद जगह रोप सकते हैं। संदीप मुखर्जी के मुताबिक लाइब्रेरी करीब एक माह पहले शुरू की गई थी।

हमारा उद्देश्य लाइब्रेरी के माध्यम से शब्द संस्कृति को बचाने के साथ ही बेहतरीन किताबें जो अक्सर धूल फांकती रहती हैं, उनका सदुपयोग करना है। लोगों से सराहना मिली तो 'ट्री लाइब्रेरी' का भी विचार आया, जिसे दीपावली के दिन शुरू किया गया। इस बारे में संदीप मुखर्जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लुप्त हो रही शब्द संस्कृति को बचाने के मकसद से हम सभी ने यह पहल की है। उम्मीद है हमारी तरह अन्य युवा भी अपने-अपने तरीके से पर्यावरण की फिक्र करेंगे। 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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