सोनभद्र [प्रशांत शुक्ल]। पत्थर, बालू व कोयला के बड़े-बड़े खदानों से पहचाने जाने वाला सोनभद्र अब सोने की खान के साथ बहुमूल्य अयस्कों के लिए जाना जाएगा। बात यहीं तक रुकी नहीं है, जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम पिछले कई दिनों से हेलीकाप्टर से जिले के चोपन, म्योरपुर व दुद्धी ब्लाक का हवाई सर्वेक्षण कर रही है। टीम के सदस्यों के अनुसार सोनभद्र में यूरेनियम के भंडार होने का अनुमान है। जांच पूरी होने से पहले भू-वैज्ञानिक इस विषय पर स्पष्ट तो नहीं बोल रहे लेकिन, दबे स्वर में इस बात को जरूर स्वीकार रहे हैं कि यहां पर कुछ बड़ा जरूर होने वाला है।

नाम न छापने की शर्त पर टीम के एक अधिकारी ने बताया कि म्योरपुर ब्लाक क्षेत्र के एक-दो स्थानों पर यूरेनियम होने की संभावना सबसे अधिक है। बताया कि यह अनुमान 1998 से लेकर 2012 तक के हुए जीएसआइ के सर्वेक्षण में ही साफ हो गया था। लेकिन इसकी मात्रा को लेकर लगातार संशय की स्थिति बनी रही है। वर्तमान समय में जो स्थिति है उससे साफ प्रतीत हो रहा है कि ब्लाक के कुदरी में यूरेनियम के पर्याप्त भंडार है, जिसको लेकर यहां पर ड्रिलिंग किया जा रहा है। वर्ष 1998 से 2012 तक शोध टीम में रहे जियोलाजिस्ट रहे एक अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी राज्य झारखंड के यूरेनियम भंडारण जादूगोड़ा के बाद सर्वाधिक भंडार सोनभद्र में मिलने की संभावना को देखते हुए यहां पर लंबा सर्वे किया गया था। बताया कि वर्तमान की टीम अब उसे सर्वे को जमीन पर उतारने का काम कर रही है। म्योरपुर व चोपन ब्लाक में कुछ स्थानों पर हवाई सर्वेक्षण के बाद खुदाई का काम चल रहा है।

ऊर्जा विभाग की टीम कर रही है सर्वेक्षण

जिले में पिछले कई दिनों से चल रहे हवाई सर्वेक्षण का कार्य केंद्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग के देखरेख में हो रहा है। जमीनी स्तर पर जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम ने मोर्चा संभाल रखा है। यह टीम हेलीकाप्टर से एरो मैग्नेटिक सिस्टम के जरिए यूरेनियम क्षेत्र को चिह्नित कर रहे हैं। वहीं जीएसआइ की  टीम द्वारा म्योरपुर ब्लाक के कुदरी व कोन क्षेत्र के हरदी स्थान पर खुदाई कर अन्य जरूरी कार्यों को पूरा कर रही है।

दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला

विंध्य पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे पुरानी चट्टान है। इसमें अपार संपदा भरे हुए हैं, जिसकी भनक केंद्र सरकार को पहले से थी। अब जाकर इसकी सुध शासन ने लिया है। सोनभद्र में यूरेनियम की खोज करीब 10 साल पहले ही हो गया था लेकिन, अब उसमें तेजी आ गई है। यूरेनियम निकालने का कार्य बहुत ही कठिन है, सरल शब्दों में समझें तो लाख टन पत्थर निकालने के बाद एक या दो किलो यूरेनियम मिलेगा। इसी वजह से इन धातुओं की मूल्य बहुत होती है। सोनभद्र यूरेनियम व सोना के अलावा कई बहमूल्य खनिज संपदा है जिसकी गहनता से जांच होनी चाहिए।

- अतुल गहराना, जियोलाजिस्ट अल्ट्राटेक ।

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