चंदौली, जेएनएन। यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन के बाद कम एवं ज्यादा नंबरों को लेकर होने वाली फजीहत पर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कड़ा रूख अपनाया है। गत साल की गड़बडिय़ों को देखते हुए इस बार शिक्षकों का स्थायी पहचान पत्र बनाया जाएगा। आधार नंबर की इसमें अनिवार्यता रहेगी। बगैर आधार शिक्षक बतौर परीक्षक शामिल नहीं हो सकेंगे। कॉपियां भी शिक्षकों के आधार नंबर जांचने के बाद ही स्ट्रांग रूम में जमा होंगी।

हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं सात फरवरी से दो मार्च तक चलेंगी। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए प्रत्येक केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। बोर्ड ने इस साल परीक्षा में परीक्षकों के अस्थायी पहचान पत्र को खत्म कर दिया है। निजी स्कूलों के शिक्षकों द्वारा इसके पीछे फर्जी पहचान पत्र के जरिए ड्यूटी कर चहेते विद्यार्थी को फायदा पहुंचाने की शिकायतें मिली थीं। कॉपी जांचने के कॉपी जांचने के बाद शिक्षक जिम्मेदारी से न पलटें, बोर्ड ने इसके लिए पहचान पत्र में आधार नंबर की अनिवार्यता की गई है। कॉपियां जांच कर अंक चढ़ाने के साथ परीक्षक को अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा। ऐसा इसलिए कि गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई करने में आसानी हो। बिना आधार नंबर के न तो शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा ड्यूटी मिलेगी और ना ही वे परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे। अबकी बोर्ड परीक्षा में इसका अनुपालन सख्ती से सुनिश्चित होगा।

बोले अधिकारी: नकल विहीन परीक्षा के साथ कॉपियों के मूल्यांकन के नियमों में सख्ती की गई है। किसी भी सूरत पर गड़बड़ी न हो, परिषद स्तर पर इसके लिए कई अहम बदलाव हुए हैं।-डॉ विनोद कुमार राय, डीआइओएस।

 

Posted By: Abhishek Sharma

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