वाराणसी, जागरण संवाददाता। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना (पीएम कुसुम कंपोनेंट-सी) के तहत गांव में स्थापित फीडरों पर कुल वार्षिक ऊर्जा खपत के सापेक्ष अब विद्युत लोड तहत सोलर प्लांट की स्थापना होगी। नवीन व नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय की दिशा निर्देशन में सेकी (सोलर एनर्जी कारपोरेशन लिमिटेड) इस कार्य को मूर्तरूप देगा।

जिले में ग्रामीण क्षेत्र के आठ फीडरों पर प्लांट की स्थापना की जानी है। सेकी की ओर से सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। प्लांट की स्थापना के लिए सेवापुरी, पिंडरा, दीनदासपुर के किसान किराए पर जमीन देने के लिए हामी भी भर दिए हैं। इस प्लांट को स्थापित करने के लिए किसान जमीन बेच भी सकता है। लीज या किराए पर भी दे सकता है। बाजार रेट मुताबिक किसानों को इसका भुगतान करने की बात है।

विद्युत फीडर के पांच किलोमीटर के दायरे में प्लांट स्थापित किया जाना है। एक प्लांट की स्थापना के लिए चार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। एक किसान के पास जमीन न होने पर दो तीन भी मिलकर दे सकते हैं। नेडा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अनुपयोगी जमीन लेने की ज्यादा कोशिश है। अगर उपजाऊ जमीन भी किसान देने को राजी होता है तो प्रति वर्ष खेती से होने वाली आमदनी से दो गुना धनराशि जमीन का किराए के रूप में देने का प्रविधान है।

प्रत्येक प्लांट से दो मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य है। इस तरह जिले में कुल 16 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा। एक प्लांट की स्थापना पर अधिकतम साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च प्रस्तावित है। इस प्लांट से उत्पादित ऊर्जा यूपीपीसीएल क्रय करेगी। सेकी को इससे आमदनी होगी तो वहीं गांव में विद्युत संकट की समस्या दूर होगी।

ग्रामीणों क्षेत्रों को पर्याप्त मिलेगी बिजली

सोलर प्लांट की स्थापना के बाद गांव में बिजली संकट दूर होगा। प्लांट से अनवरत ऊर्जा के उत्पादन से बिजली की कमी नहीं होगी। गांवों को पर्याप्त मात्रा में बिजली मिलेगी।

प्लांट की स्थापना के लिए सर्वे का कार्य लगभग पूर्ण है। कुछ किसान जमीन देने के लिए आगे भी आएं हैं। प्लांट स्थापना से किसानों की आमदनी बढ़ेगी, रोजगार भी मिलेंगे। साथ ही बिजली की समस्या भी दूर होगी।

प्रेम प्रकाश सिंह, प्रभारी परियोजना अधिकारी नेडा

Edited By: Saurabh Chakravarty