करोड़ों की लागत से बनी वाराणसी की एनएचएआई सड़कें पांच साल में ही बीमार, मरम्मत के टांके भी दे रहे जवाब
वाराणसी में एनएचएआई द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़कें पांच-सात साल में ही मरम्मत के सहारे चल रही ...और पढ़ें

वाराणसी में एनएचएआइ की सड़कें अब टांके के सहारे जिंदा करोड़ों की सड़क पांच-सात साल में बीमार।
HighLights
एनएचएआई की सड़कें पांच-सात साल में ही मरम्मत मांग रही हैं।
करोड़ों खर्च के बावजूद मरम्मत के टांके भी उखड़ रहे हैं।
खराब सड़कें दोपहिया चालकों के लिए खतरनाक बन रही हैं।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। करोड़ों-अरबों रुपये खर्च और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का दावा करने वाली एनएचएआइ की सड़कें अब टांकों के सहारे सांस ले रही हैं। वाराणसी से गाजीपुर जाने वाले मार्ग पर जगह-जगह कंक्रीट की सड़क को काटकर मरम्मत के टांके लगाए गए हैं।
अब सवाल यह है कि जिस सड़क को वर्षों तक भारी यातायात का बोझ सहने के लिए बनाया गया था, उसे पांच-सात साल के भीतर ही इतने बड़े पैमाने पर मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ने लगी?
विडंबना यह है कि सड़क पर लगाए गए मरम्मत के टांके भी अब जवाब देने लगे हैं। कहीं पैच उखड़ गया है तो कहीं उसके किनारे धंसने लगे हैं। वाहनों के गुजरने पर ऊंच-नीच वाला हिस्सा दोपहिया चालकों के लिए खासा खतरनाक बन रहा है। रात और बारिश में इन स्थानों पर हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
कंक्रीट सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखने वाली मोटी परत से तय नहीं होती। नीचे की मिट्टी, उसकी भार सहने की क्षमता, पानी की निकासी, नीचे बिछाई जाने वाली पत्थर की परत, कंक्रीट की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई, जोड़ और पानी देकर उसकी सही तरह से देखभाल, हर कड़ी मजबूत होनी जरूरी है।
करीब सात मीटर चौड़ी दो लेन की कंक्रीट सड़क का एक किलोमीटर बनाने में परिस्थितियों के अनुसार लगभग ढाई से चार करोड़ रुपये या इससे अधिक खर्च हो सकता है। इसमें जमीन तैयार करने, नीचे पत्थर की परत बिछाने, कंक्रीट की सड़क बनाने, पानी की निकासी और दूसरे निर्माण कार्यों का खर्च शामिल होता है। वास्तविक लागत सड़क की बनावट, मोटाई और परियोजना की शर्तों पर निर्भर करती है।
