सोनभद्र, जेएनएन। सोनभद्र व सिंगरौली में पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के मामले में सुनवाई करते हुए एनजीटी ने बुधवार को दोनों जनपदों की दर्जनों औद्योगिक इकाइयों पर 155 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसकी जानकारी होते ही संबंधित इकाइयों में हलचल मच गई है।

याचिकाकर्ता व सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने बताया कि एनजीटी ने सोनभद्र व सिंगरौली के विभिन्न औद्योगिक संस्थानों को पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने का जिम्मेदार मानते हुए 155 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। बताया कि एनजीटी ने एस्सार व विंध्याचल परियोजना को अपने-अपने ऐश डाइक की मरम्मत के लिए 31 दिसम्बर तक का समय दिया है। साथ ही केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिहंद जलाशय में ऐश के साथ मानव जीवन के लिए खतरनाक रसायन जाने से जो भी नुकसान हुआ है उसकी रिपोर्ट तैयार करके प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। इसके साथ राख के डिस्पोजल के लिए खुले माइंस में राख कब से डाली जायेगी, इसकी शीघ्र शुरु करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कहा कि क्योंकि स्थिति अत्यंत ही खराब हो गयी है। वहीं आदेश के उल्लंघन में संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी निर्देश जारी किया है। अश्वनी दुबे ने कहा कि सोनभद्र व सिंगरौली मेंं यदि यही हालात रहे तो दस वर्षो बाद सोनभद्र व सिंगरौली में मानव जीवन का अस्तित्व मिट जायेगा। दिल्ली से भी अधिक प्रदूषण सोनभद्र व सिंगरौली में व्याप्त है। कहा कि 2013 से सिंगरौली व सोनभद्र के स्वच्छ पर्यावरण के लिए वह संघर्षरत है।

ये हैं शामिल

जुर्माना में एनटीपीसी विन्ध्याचल, एनटीपीसी शक्तिनगर, एनटीपीसी रिहंद, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम, लैंको अनपरा सी परियोजना, एस्सार पावर, शासन परियोजना रिलायंस, हिण्डालको इण्डस्ट्रीज महान, बजाज एनर्जी, एम पी पावर जनरेटिंग कम्पनी, एमपी पावर बोर्ड, एमबी पावर, ओबरा थर्मल पावर, प्रयागराज थर्मल पावर प्लांट, जे पी बीना थर्मल पावर प्लांट, जेपी निगरी थर्मल पावर प्लांट, एनटीपीसी दादरी सहित अन्य परियोजनाएं शामिल हैं।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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