वाराणसी, जेएनएन। नववर्ष का जश्न इस बार लोग होटलों से अधिक बाहर मनाने वाले हैं। इसमें सबसे अधिक उत्साह गंगा की लहरों पर तैरते बजड़े का है। बजड़े को खूबसूरत ढंग से सजाने के लिए मशहूर डेकोरेटरों की सहायता ली जा रही है। बजड़ा असि घाट से राजघाट तक का फेरा तय करेगा। बजड़े पर ही एक दर्जन भारतीय व्यंजन परोसे जाएंगे जो पूरी तरह से शाकाहारी होगा। इन व्यंजनों में बनारस के मशहूर व्यंजन को वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा शास्त्रीय नृत्य और संगीत का कार्यक्रम भी एक घंटे का होगा। इसे स्थानीय कलाकार ही पेश करेंगे। 

पर्यटन व्यवसाय में दो दशक से अधिक समय से कार्य कर रहे सुधांशु सक्सेना ने मंगलवार को बताया कि हम लोग चंद्राप्रभा सेंचुरी और लतीफशाह के पास भी ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं कि यहां पर भी लोग नये साल का जश्न यादगार रूप से मना सकें। यहां पर भी प्रयास होगा कि अधिक से अधिक व्यंजन देशी ही हो। व्यंजनों को गैस के स्थान पर गोहरी पर पकाया जाएगा। 

नववर्ष के पहले दिन गंगा के उस पार और शूलटंकेश्वर के पास साहसिक खेलों की व्यवस्था की जा रही है। उसमें स्पीड बोट और बंकी जंप मुख्य आकर्षण होंगे। बच्चों के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। सभी स्थानों पर प्रशिक्षित लोग मौजूद रहेंगे। होटलों और क्लबों में नववर्ष मनाने का रिवाज तो सालों से चला आ रहा है। इस बार हमारी कोशिश है कि लोग नववर्ष बाहर मनाएं। इसके लिए हम लोग बाहर से भी प्रशिक्षित लोगों को बुलावा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि नववर्ष का जश्न बच्चों के साथ उनके माता-पिता और भाई-बहन खुलकर मना सके। पैकेज एक हजार रुपये से शुरू होकर पांच हजार रुपये तक जाएगा। किसी भी कार्यक्रम में शराब नहीं परोसा जाएगा। 

Posted By: Abhishek Sharma

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