वाराणसी, जेएनएन। फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने पिछले 18 साल के परीक्षा रिकार्ड को नए सिरे से बनाने का निर्णय लिया था। वहीं इसके लिए बनी समिति ने पिछले चार साल में कोई काम नहीं किया। इसे देखते हुए कुलपति ने पुरानी कमेटी को निरस्त कर पांच सदस्यीय नई कमेटी बनाई है। कुलपति ने प्रो. पीएन सिंह की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति ने मानव शक्ति व आवश्यक स्टेशनी का प्रस्ताव मांगा है ताकि अभिलेखों के नवीनीकरण का कार्य जल्द से जल्द शुरू कराया जा सके।

वर्ष 1992 से 2009 तक के परीक्षा अभिलेखों में व्यापक पैमाने पर हेराफेरी की गई है। टेबुलेशन रजिस्टर के पन्ने बदल दिए गए हैं। यही नहीं बगैर किसी आदेश के अभिलेखों में तमाम कटिंग की गई है। कटिंग के बावजूद अभिलेखों में किसी भी अधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं है। परीक्षा अभिलेखों में हेराफेरी की जांच एसआइटी भी कर रही है। इसे देखते हुए वर्ष 2014 में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने 18 साल का परीक्षा रिकार्ड संदिग्ध घोषित कर दिया। साथ ही नया अभिलेख बनाने का निर्देश दिया। कार्यपरिषद के आदेश पर नए सिरे से परीक्षा अभिलेख बनाने के लिए कमेटी भी गठित कर दी। इस बीच कमेटी के दो सदस्य सेवानिवृत्त हो गए। इसके चलते परीक्षा अभिलेखों के नवीनीकरण का कार्य शुरू नहीं हो सका।

कंप्यूटर में दर्ज रिकार्ड को बनाएंगे आधार : मैनुअल व कंप्यूटर परीक्षा रिकार्ड में काफी अंतर बताया जा रहा है। टेबुलेशन रजिस्टर में हजारों ऐसे परीक्षार्थियों का नाम दर्ज है जिसका रिकार्ड कंप्यूटर में नहीं हैं। फिलहाल कंप्यूटर में दर्ज रिकार्ड को आधार मानकर नया परीक्षा अभिलेख बनाने का निर्णय लिया गया है।

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