जागरण संवाददाता, वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने भी वर्तमान सत्र से ही नई शिक्षा नीति लागू कर दिया है I कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि भारत सरकार के द्वारा पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 को लागू करने की घोषणा के एक वर्ष व्यतीत हो गया है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य 21वीं शताब्दी में हमारे देश की उन्नति तथा आवश्यकताओं के अनुकूल जनमानस को जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान करना है। यह शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली है, जो राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को उच्चतम गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रणाली उपलब्ध करवा कर भारत को वैश्विक पटल पर वैश्विक ज्ञान में महाशक्ति बनाकर सुदृढ़ तथा जीवंत समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा भी प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को शैक्षिक सत्र- 2021-22 में लागू करने का निर्देश दिया गया था I

शासन के निर्देश पर इसी सत्र से नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राचीन भारतीय मूल्यों में निहित आदर्शों को आधार बनाकर अनेक बिंदुओं को सहेजा गया है और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय ज्ञानरूपी प्रवाह को निरंतर 230 वर्षों से अध्ययन-अध्यापन के माध्यम से संरक्षण तथा संवर्धन करता रहा है, इसलिए यहां पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों का नवीनीकरण कर यथासंभव अपने प्राचीन ग्रंथों के पठन-पाठन के अनुरूप पाठ्यक्रम को तैयार कर और यह भी प्रयास कर रहा है कि इस विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आरंभ करने के साथ ही हमारे प्राचीन ग्रंथों का भी संरक्षण तथा संवर्धन निरंतर होता रहे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हमारा पाठ्यक्रम भी योजनाबद्ध रूप में आरंभ किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा एजुकेशन पॉलिसी में अनेकों बदलाव किये गये हैं। अबएक वर्ष पूर्व केन्द्रीय सरकार ने नयी शिक्षा नीति को स्वीकार की है। जो 2021-22 सत्र से लागू करने  का निर्देश है ।इसके तहत भारत को वैश्वीक ज्ञान महाशक्ति बनाया जायेगा। शिक्षकों के गुणवत्ता के स्तर को भी बढाने के लिये नई शिक्षा नीति में कई प्रावधान किये गये हैं।

कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि यह प्राच्य विद्या का शिक्षण संस्थान है यहां संस्कृत-संस्कृति और संस्कार से युक्त संगम का प्रवाह है यहां से राष्ट्रीयता, नैतिकता और विश्वबन्धुत्व का भाव जागृत कर तथा उन्हे अपने विषयों या विभागों के पाठ्यक्रमों में रोजगारपरक ज्ञान दिया जायेगा।

यहां पर शास्त्री तीन वर्ष और चार वर्ष का होगा, जिसमें विद्यार्थी को उसके समय और सुविधा के अनुसार प्रत्येक वर्ष का क्रमश: प्रमाण पत्रीय डिप्लोमा,डिप्लोमा और डीग्री की उपाधि प्राप्त होगी।

प्रमुख विभाग : साहित्य,व्याकरण,वेद,वेदान्त,ज्योतिष,'पुराण,दर्शन,योग तन्त्र आगम,पाली,प्राकृति,बौद्ध आदि के साथ साथ यहां पर आधुनिक विषयों में शिक्षा शास्त्र, पत्रकारिता,विज्ञान, गृहविज्ञान, सामाजिक विज्ञान,भाषा विज्ञान और विदेशी भाषाओं 'सहित अनेक विषयों को भी पढाया जाता है जिसमें विभिन्न तरह से पाठ्यक्रमों को तैयार कर लिया गया है ।

Edited By: Saurabh Chakravarty